भगवान के अंग संग रहते हैं नाग देवता, पंचमी के दिन अवश्य करें पूजन

वैसे तो सावन के महीने के हर दिन भगवान शिव का पूजन किया जाता है। नाग भगवान शंकर के आभूषण हैं तथा उनके गले में लिपटे रहते हैं परंतु शिव का निराकार रूप शिवलिंग भी सर्पों के साथ ही सजता है इसीलिए पंचमी के दिन नागों का पूजन करने का विधान है।


शास्त्रों के अनुसार हमारी पृथ्वी का भार भी शेषनाग के फन पर टिका है, भगवान विष्णु तो नागराज की शैय्या पर क्षीर सागर में शयन करते हैं। मान्यता है कि जब-जब भगवान ने धरती पर अवतार लिया शेषनाग भी किसी न किसी रुप में धरती पर अवतरित होकर उनके साथ रहे हैं। रामावतार में वह भाई लक्ष्मण बनकर और कृष्णावतार में भाई बलराम बनकर साए की तरह प्रभु के साथ ही रहे हैं। वासुदेव जी जब नन्हें कृष्ण को लेकर गोकुल जाने के लिए यमुना पार कर रहे थे तो कृष्ण के सिर पर नागफनों की छाया करके नागदेवता ने ही उन्हें भारी वर्षा से भी बचाया था। विभूति योग का वर्णन करते हुए भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं अर्जुन से कहा था कि सांपों में मैं वासुकि एवं नागों में शेषनाग हूं। इससे स्पष्ट है कि नाग विभूति योग सम्पन्न हैं तथा हमारी संस्कृति में उन्हें देवत्व प्राप्त है। अथर्ववेद में श्वित्र,स्वज,पृदाक, कल्माष व ग्रीव आदि पांच प्रकार के सर्पों का उल्लेख मिलता है जो दिशाओं के आधार पर वायु मण्डल के रक्षक हैं।

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