क्या कभी आपने सोचा है की आखिर मॉल और ऑफिस में टॉयलेट के दरवाजे छोटे क्यों होते है ….

आपने अक्सर ऑफिस, मल्टीप्लेक्स या मॉल में जरुर देखा होगा की इन पब्लिक टॉयलेट में दरवाजा फर्श से कुछ इंच ऊपर ही ख़त्म हो जाता है | लेकिन ये कोई खिड़की का बचा हुआ पल्ला नही जो वहां लगा दिया गया हो |आज हम आपको बतायेंगे इसके पीछे की सभी असली वजहें ……

गज़ब दुनिया

1.पब्लिक टॉयलेट्स पूरा दिन इस्तेमाल होते रहते हैं| इनका फर्श लगातार खराब होता रहता है| फर्श और दरवाज़े के बीच कुछ जगह होने से टॉयलेट में पोछा लगाना आसान हो जाता है, वाइपर और मॉप घुमाने में भी सहूलियत रहती है |

2.पब्लिक टॉयलेट्स का मुख्य काम होता है आप पर हो रहे कुदरत के प्रभाव को कम करना परन्तु कुछ लोग इसका उपयोग अपने बेडरूम की तरह करना चाहते है और कामदेव के प्रभाव को कम करने के लिए पब्लिक टॉयलेट में ही शुरू हो जाते है | पब्लिक टॉयलेट में इसको रोका जा सके इसके लिए भी दरवाजे छोटे होते है |

3.कई बार टॉयलेट के अंदर मेडिकल इमरजेंसी हो जाती है और दरवाज़ा बंद होने से बाहर लोगों को पता ही नहीं चलता है कि अंदर किसी को मदद की आवश्यकता है | अगर कोई बड़ी देर से अंदर है तो बाहर वालो को यह आसानी से पता चल जायेगा की कोई अन्दर है |

4.कभी-कभी छोटे बच्चे अंदर से टॉयलेट खुद को बंद कर लेते हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि इसे खोलें कैसे| अगर बच्चे की मदद के लिए कोई न हो, तो बच्चे दरवाज़े के नीचे से बाहर निकल सकते हैं |

5.पब्लिक टॉयलेट्स में छोटे दरवाज़े लगाने का विचार सबसे पहले अमरीका वालो को आया था | अमरीका एक कैपटलिस्ट देश है, जिस भी तरह से चार पैसे बच जाएं, वो काम ज़रूर करता है, तो वहां किसी के दिमाग में आइडिया आया कि छोटा दरवाज़ा लगाने से लकड़ी का बिल कम किया जा सकता है | मॉल या एयरपोर्ट के में टॉयलेट्स संख्या दर्जनों तक पहुंच जाती है ऐसे में दरवाज़ों में थोड़ा-थोड़ा करके काफी बचत हो सकती है |

 

 

YOU MAY LIKE