जानिए, क्यों जलाते हैं भगवान के सामने अगरबत्ती?

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क्या आपको पता है कि हम किसी धार्मिक समारोह में अगरबत्ती क्यों जलाते हैं? इसके एक से ज़्यादा कारण हैं। यह एक हिन्दू प्रथा है जो सदियों से चली आ रही है। हर हिन्दू प्रथा के पीछे कुछ न कुछ ठोस कारण होते हैं। चलिए अगरबत्ती जलाने के पीछे क्या कारण है यह भी जानें।


आध्यात्मिक कारण:

अगरबत्ती जलाने के पीछे आध्यात्मिक कारण है। ऐसा मानते हैं कि अगरबत्ती से जो धुंए के छल्ले निकलते हैं वह हमारी पूजा को सीधे भगवान के पास ले जाते हैं। यह आपके विचार को सुंदर और पवित्र रखते हैं।

अगरबत्ती के पूरे जलने पर वातावरण में अच्छी खुशबू फैलती है और राख पीछे छूट जाती है। यह एक हिन्दू प्रथा है जो इंसान के स्वभाव को दर्शाता है। यह इंसान को दूसरों के लिए कुर्बानी देना सिखाता है। यह अपनी आकांक्षा को छोड़कर दूसरों की ज़िंदगी में उजाला करना सिखाता है। इसलिए हम धार्मिक समारोह में अगरबत्ती जलाते हैं।

मनोवैज्ञानिक कारण: 

अगरबत्ती को कई रोगोपचार में भी इस्तमाल करते हैं। जब आप अगरबत्ती जलाते हैं तो इसकी खुशबू से दिमाग पर हीलिंग और आरामदेह प्रभाव पड़ता है। आप मानसिक तौर पर रिलैक्स हो जाते हैं और जब आप किसी धार्मिक समारोह में बैठते हैं तो आप अपनी परेशानी को भूल जाते हैं।

भगवान की पूजा में आपका दिल और दिमाग लगता है। जब आप पूरे मन से पूजा करते हैं तो यह समाधि का काम करता है और इससे तनाव दूर होता है।

माहौल बनाता है: 

हिन्दू प्रथा में जब आप अगरबत्ती जलाते हैं तो यह आपके आस पास की गन्दी बदबू को हटाता है। यह किसी धार्मिक समारोह के लिए सही माहौल बनाता है। अगरबत्ती के सुगंध मात्र से आप यह समझ सकते हैं कि कोई धार्मिक अनुष्ठान चल रहा है। इससे कीड़े मकौड़े भी दूर भागते हैं।

दूसरे कारण: 

अगरबत्ती सिर्फ धार्मिक प्रथा का ही हिस्सा नहीं हैं, यह कई दशकों से चीन, इजिप्ट, तिब्बत की प्रथाओं में चला आ रहा है। वह इसका इस्तमाल धार्मिक समारोह में ही नहीं पर निजी चीज़ जैसे एरोमा थेरेपी में भी करते आ रहे हैं। इसलिए अगली बार जब आप अगरबत्ती जलाते हैं तो यह ध्यान रखिये कि यह आपको एक से अधिक रूप में फायदा पहुंचाता है।

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