जानिए क्या है मगरमच्छ के आँसू के पीछे की छुपी असली कहानी

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सालों से ये कहावत बोली जाती है पर क्या कभी आपने सोचा है कि ये कहावत बनी कैसे? जब कोई दिखावे के लिए रोता है, तो उसके रोने को ‘मगरमच्छ के आंसू बहाना’ कहा जाता है। पर झूठी हमदर्दी का आखिर मगरमच्छों से क्या सम्बन्ध?


ये कहावत 14वीं शताब्दी से प्रचलित है, जब एक प्रसिद्ध संस्मरण ‘The Voyage and Travel of Sir John Mandeville’ में ये लिखा गया था कि एक तरह का जानवर अपने इंसानी शिकारों को निगलते हुए आंसू बहाता था। तभी से मगरमच्छ झूठे पछतावे के रूपक बन गए हैं।

2007 में University of Florida के Zoologist Kent Vliet ने भी सिद्ध किया था कि वाकई कुछ जानवर खाते हुए सुबकते हैं। उन्होंने 7 में से 5 घड़ियालों को शिकार निगलने के बाद रोते हुए भी फिल्माया था।

Vliet की Theory के अनुसार जब इन जानवरों के जबड़े खाते हुए आपस में टकराते हैं, तब एक शारीरिक प्रक्रिया कि वजह से इनकी आंखों से पानी निकलता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया को “Crocodile Tears” कहते हैं।

तो इस तरह बनी थी ये कहावत जो आज तक प्रचलित है, जिसे शेक्सपियर तक ने अपनी कहानियों में इस्तेमाल किया है।

 

source : mentalfloss
Where Does the Expression ‘Crocodile Tears’ Come From?

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