कभी दो वक्त की रोटी के लिए लोगो के सामने हाथ फ़ैलाने से लेकर ‘न्यायाधीश’ बनने तक ट्रांसजेन्डर की ये कहानी आप के दिल को छु जाएगी

आज मुझे फिल्म ओम शांति ओम  का वो डायलॉग याद आ रहा है, “कहते है किसी अगर किसी चीज को दिल से चाहो.. तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने के लिए लग जाती है” । शनिवार को इस्लामपुर कोर्ट परिसर में कुछ इसी तरह हुआ की एक सफ़ेद गाड़ी और साथ में ड्राईवर , गाड़ी के आगे एक लाल कलर की नेम प्लेट लगी हुई और जिस पर लिखा हुआ था ‘ड्यूटी पर न्यायाधीश’ जब गाड़ी इस्लामपुर कोर्ट परिसर में पहुंची तो, उस समय लोगो को यही डायलॉग याद आने लगा होगा क्यों की इस गाड़ी में और कोई नहीं जोइता मंडल थी । ट्रांसजेंडर्स के साथ साथ पुरे देश की लिए  सेलिब्रेशन का मोका था ।

सफर संघर्षमय रहा….

एक ट्रांसजेन्डर समुदाय से निकलने वाली जोइता मंडल का राष्ट्रीय लोक अदालत तक का सफर काफी संघर्षमय रहा था । दो वक्त की रोटी के लिए लोगो के सामने हाथ फेलाने से लेकर सोशल वर्कर का काम करते हुए, राष्ट्रीय लोक अदलात की बेंच के लिए चयनित होना, अपने आप में उनके इस संघर्ष की कहानी साफ साफ बया कर रहा है । 8 जुलाई को लोक अदालत के लिए इस्लामपुर के सब-डिविजनल लीगल सर्विस कमेटी की तरफ से जोइता को बेंच के लिए नियुक्त किया गया था। ये समय जोइता मंडल और उनके समुदाय के लिए एक नई ख़ुशी और एक नई उम्मीद की किरण बन कर आया था । जोइता साल 2011 से ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित कई मुद्दों पर काम कर रही हैं।

ट्रांस वेलफेयर इक्विटी के संस्थापक अभीना ने कहा, यह पहला मौका है जब किसी इस समुदाय के व्यक्ति को यह अवसर मिला है।

एक घटना ने बदल दी जिंदगी

जोइता का दफ्तर उस बस स्टैंड से सिर्फ 10 मिनट की दूरी पर था जहां कभी उन्हें सोना पड़ा था। क्योंकि उनके ट्रांसजेंडर होने की वजह से एक होटल ने उन्हें रूम देने से मना कर दिया था। इस घटना के बाद ही जोइता ने अपने जैसे और भी दूसरे लोगों के लिए लडऩे का इरादा बनाया था।

जोइता ने कहा है कि मुझे इस बात का गर्व है कि मेरा सेलेक्शन लिंग भेद के खिलाफ समाज को एक सख्त संदेश देगा।

 

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