एक बार फिर गरीब पिता का दर्द समझ गयी बेटी ,पिता को ना हो तकलीफ इसलिए खुद को लटका लिया फंदे से …

भारत आज लिंगानुपात के उस द्रश्य को देख रहा है जहाँ पुरुषो के मुकाबले स्त्रियों की संख्या में अच्छी खासी कमी आ चुकी है | कोई कोई क्षेत्र तो इतना प्रभावित हुआ है की वहां पर पत्नियाँ खरीदनी पड़ रही है | इतना सब होने के बावजूद हमारे देश में आज भी अधिकतर लोगो की यही सोच है की उनके यहाँ लड़का पैदा होना चाहिए ना की लड़की , कुछ अंधविश्वासी तो आज भी देवी देवताओ से इसी बात की जाड फुक करवाते है की घर में सोने का टुकड़ा जन्मे , जब की हम देखते है की बेटियां अपने पिता के लिए अपने घर के लिए और अपने देश के लिए क्या कुछ नही करती फिर भी आज तक ना जाने क्यों बेटियाँ हमारे दिल में जगह नही बना पाई है |

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महाराष्ट्र में सुरेश झुटे की 18 वर्षीय पुत्री सारिका अपने पिता को आत्महत्या करने से रोकना चाहती थी, इसलिये उसने खुद अपनी जान ले ली | सारिका के पिता के सिर पर बहुत कर्ज़ था | इस बार की सारी फसल खेत में ही जल गई थी, जिस कारण वे कर्ज़ लौटाने में सक्षम नही थे | उनके परिवार की हालत आर्थिक रूप से बहुत ख़राब हो गयी थी |सारिका से घर और अपने पिता की इतनी ख़राब हालत देखी नहीं गयी | कर्ज़ से परेशान होकर सारिका के चाचा ने कुछ ही दिनों पहले आत्महत्या कर ली थी, जिससे सारिका को यह डर था कि कहीं उसके पिता भी आत्महत्या न कर लें |

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सारिका ने सुसाइड नोट में लिखा,
‘पापा में आपकी हालत को अच्छी तरह से जानती हूं | बारिश न होने से सारी फसल बर्बाद हो गई और इस कारण चाचा ने भी आत्महत्या कर ली है | हमारा परिवार भी कर्ज़ में बहुत डूबा हुआ है | मुझसे आपकी ऐसी हालत देखी नहीं जा रही |पिछले साल आपने दीदी की शादी की, उसका कर्ज़ भी आप अभी तक नहीं चुका पाए हैं | आपके ऊपर मेरी शादी की भी ज़िम्मेदारी है | मैं नहीं चाहती की आप चाचा की तरह ही आत्महत्या कर लें, इसलिये मैं अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर रही हूं |
‘आपकी सारिका’

सुसाईड नोट को पढ़ कर उस पिता पर क्या गुज़री इसका अंदाज़ा भी नही लगाया जा सकता है लेकिन आज भी इस देश में कितनी ही ऐसी सारिका है जो अपने पिता के लिए बलिदान दे देती है फिर भी ना जाने क्यों सब को लड़का ही चाहिए | माना की हर लड़का अपने साथ सोने के अंडे लेकर पैदा होता है तो क्या यह सच नही है की बुढ़ापे में वही अंडे उन्ही माता पिता के ही सर फोड़े जाते है | अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नही जब आपके लड़के को लड़के से ही शादी करनी पड़ेगी | इसमें हम सारिका की आत्महत्या को सही नही मानते मगर उस बेटे से सारिका को जरुर अच्छा मानते है जो अपने पिता को वृदा आश्रम में ठोकरे खाने के लिए छोड़ आता है | खैर जो भी हो मगर एक पिता ने अपनी अनमोल बेटी को खो दिया जो शायद जी कर अपने पिता के लिए कुछ ज्यादा कर सकती थी |

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