ये दिल भी दोस्त ज़मीं की तरह हो जाता है डाँवा-डोल कभी ये रोटियाँ हैं ये सिक्के हैं और दाएरे हैं ये एक दूजे को दिन भर पकड़ते रहते हैं ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा वगर्ना...