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दो लकड़हारों की कहानी Two Woodcutter story in hindi

बहुत समय पहले की बात है जंगल के करीब एक गाँव में दुखिया और सुखिया नाम के दो लकड़हारे रहते थे. एक सुबह जब...

श्रीमद्‍ भगवद्‍गीता – द्वितीयअध्याय – सांख्ययोग Bhagwat Geeta Chapter 2

अथ द्वितीयोऽध्यायः ~ सांख्ययोग अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद      संजय उवाच:- तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥2.1॥ भावार्थ :- संजय...

रतन टाटा के अनमोल विचार Ratan Tata Quotes in Hindi

Quote 1: I don’t believe in taking right decisions. I take decisions and then make them right. मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता।...

प्रेरणादायक कहानी – सफलता का रहस्य Secret of Success in Hindi

एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है। सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल...

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय सात – ज्ञानविज्ञानयोग GnyanVignyanYog Bhagwat Geeta Chapter 7

अथ सप्तमोऽध्यायः- ज्ञानविज्ञानयोग विज्ञान सहित ज्ञान का विषय,इश्वर की व्यापकता श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले-...

श्रीमद्‍ भगवद्‍गीता – अध्याय छः -आत्मसंयमयोग AtmSanyamYog Bhagwat Geeta Chapter 6

अथ षष्ठोऽध्यायः- आत्मसंयमयोग कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ के लक्षण, काम-संकल्प-त्याग का महत्व श्रीभगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः । स सन्न्यासी च योगी च न...

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय पाँच – कर्मसंन्यासयोग KarmSanyasYog Bhagwat Geeta Chapter 5

अथ पंचमोऽध्यायः- कर्मसंन्यासयोग ज्ञानयोग और कर्मयोग की एकता, सांख्य पर का विवरण और कर्मयोग की वरीयता अर्जुन उवाच सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं...

श्रीमद्‍ भगवद्‍गीता -अध्याय चार-ज्ञानकर्मसंन्यासयोग GyanKarmSanyasYog Bhagwat Geeta Chapter 4

अथ चतुर्थोऽध्यायः- ज्ञानकर्मसंन्यासयोग योग परंपरा, भगवान के जन्म कर्म की दिव्यता, भक्त लक्षण भगवत्स्वरूप श्री भगवानुवाच इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ । विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥ भावार्थ : श्री...

श्रीमद्‍ भगवद्‍गीता – अध्याय तीन – कर्मयोग – Karmyog Bhagwat ...

अथ तृतीयोऽध्यायः- कर्मयोग   ज्ञानयोग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की आवश्यकता अर्जुन उवाच ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन । तत्किं कर्मणि घोरे मां...

श्रीमद्‍ भगवद्‍गीता – अध्याय एक- अर्जुनविषादयोग Bhagwat Geeta Chapter 1

                                    अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग    दोनों सेनाओं के प्रधान...