हमारी तरक्की के पैर इतने बड़े हो गये है की इसके इसके नीचे कब इन्सान कुचला जाता है किसी को पता ही नही चलता ,और कुछ महाशय तो इन्हें इन्सान ही नही मानते | वैसे तो आज जब भी हम किसी...