गन्धमादन पर्वत स्थित कुबेर के महल में चार वर्ष व्यतीत करने के पश्‍चात पाण्डव वहाँ से चले। मार्ग में अनेक वनों में रुकते-रुकाते, स्थान-स्थान पर अपने शौर्य और पराक्रम से दुष्टों का दमन करते, ऋषियों और ब्राह्मणों के सत्संग का लाभ...