राजस्थान का ताजमहल कहलाने वाले इस मंदिर से जुड़े है भगवान विष्णु के कई चमत्कार ,जाइये इसके बारे में ……

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राजस्थान के ताजमहल के नाम से सुप्रसिद्ध देलवाड़ा के जैन मंदिर ,अपनी अनोखी कलाकृति और शिल्प के लिए जाने जाते है। देलवाडा मंदिर, पाँच मंदिरों का एक समूह है। ये राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित हैं। इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था। यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथकरों को समर्पित हैं। मंदिरों के लगभग 48 स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियां बनी हुई हैं। मान्यता है की भगवान विष्णु ने यहाँ अवतार लिया था। इसे देखने के लिए लाखों लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं।

राजस्थान का ताजमहल देलवाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया
राजस्थान का ताजमहल देलवाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया

कहां है ये अद्भुत मंदिर-
माउंट आबू में बना ये मंदिर देलवाड़ा के जैन मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यहां कुल पांच मंदिरों का समूह जरुर है लेकिन यहां के तीन मंदिर खास हैं। देलवाड़ा का ये मंदिर 48 खंभों पर टिका हुआ है। इसकी खूबसूरती और नक्काशी के कारण इसे राजस्थान का ताज महल भी कहा जाता है। इस मंदिर की एक-एक दीवार पर बेहग सुंदर कालाकारी और नक्काशी की गई है।

राजस्थान का ताजमहल देलराजस्थान का ताजमहल देलवाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया वाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया
राजस्थान का ताजमहल देलवाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया

यहां भगवान विष्णु ने लिया था मनुष्य रूप में अवतार-
इस मंदिर से जुड़ी है पौराणिक कथा है कि भगवान विष्णु ने बालमरसिया के रूप में अवतार लिया । मान्यता है कि भगवान विष्णु का ये अवतार गुजरात के पाटन में एक साधारण परिवार के घर में हुआ। विष्णु भगवान के जन्म के बाद ही पाटन के महाराजा उनके मंत्री वस्तुपाल और तेजपाल ने माउंट आबू में इस मंदिर के निमार्ण की इच्छा जागी। जब भगवान विष्णु के अवतार बालमरसिया ने महाराज के यह बात सुनी तो वो वस्तुपाल और तेजपाल के पास इस मंदिर की रुपरेखा लेकर पहुंच गए। तब वस्तुपाल ने कहा कि अगर ऐसा ही मंदिर तैयार हो गया तब वो अपनी पुत्री की शादी बालमरसिया से कर देंगे। भगवान विष्णु के अवतार बालमरसिया ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और बेहद सुंदर मंदिर का निर्माण किया।

राजस्थान का ताजमहल देलवाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया
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नाखून से बना दी थी झील-
पौराणिक कथा के अनुसार, बालमरसिया की होने वाली दादीसास ने छल कर दिया और शादी करने के लिए एक और शर्त रख दी। उन्होंने शर्त रखी कि अगर एक रात में सूरज निकलने से पहले अपने नाखूनों से खुदाई कर मैदान को झील में तब्दील कर देंगे। तब वो अपनी पोती का हाथ बालमरसिया के हाथों में देंगी। यह सुन-कर उन्होंने एक घंटे में ही ऐसा करके दिखा दिया। फिर भी बालमरसिया की होने वाली दादीसास ने अपनी पोती का विवाह उनसे नहीं किया। कहते हैं कि बाद में इस बात को लेकर भगवान विष्णु कोध्रित हो उठे और उन्होंने अपनी होने वाली दादीसास का वध कर दिया।

राजस्थान का ताजमहल देलवाड़ा जैन मंदिर ,गज़ब दुनिया
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कब और किसने करवाया था निर्माण-
दरअसल इस मंदिर का निर्माण गुजरात के सोलंकी राजा वीरध्वज के महामंत्री वस्तुपाल और उसके भाई तेजपाल ने करवाया था। इस मंदिर की देवरानी-जेठानी के गोखलों की कला दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मंदिर का निर्माण 11वीं और 12वीं शताब्दी में किया गया था। देलवाड़ा का ये शानदार मंदिर जैन धर्म के तीर्थकरों को समर्पित है। यहां के पांच मंदिरों के समूह में विमल वसाही सबसे प्राचीन मंदिर है जिसे 1031ईसवी में तैयार किया गया। 1231 में वस्तुपाल और तेजपाल दो भाईयों ने इसका निर्माण करवाया था। उस वक्त इस मंदिर को तैयार करने में 1500 कारीगरों ने काम किया था। वो भी कोई एक या दो साल तक नहीं, पूरे 14 सालों तक। इस मंदिर के निर्माण में उस वक्त करीब 12 करोड़ 53 लाख रूपए खर्च किए गए।

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