अगर आपने पीया सोमरस तो आप हो जायेंगे अतुलित बलवान ,जानिए सोमरस के बारे में पूरी जानकारी

हम सभी ने बहुत ही सुन्दर दुनिया देखी है, जिसमे हमने बहुत से अच्छे पकवान और पेय पदार्थो का सेवन किया है परन्तु क्या हम कभी सोचते है की जिन्होंने इस असीमित और अपरिमित,अत्यंत सुन्दर और सर्वश्रेष्ट दुनिया की रचना की उनका भोजन और पेय क्या है, सोमरस एक ऐसा पेय पदार्थ है जिसका वर्णन देवताओं से प्रत्येक ग्रंथ, कथा, में बताया गया है और जिसे सभी देव गणों को सोमरस का पान करते हुए बताया जाता है |

सोमरस के बारे में अध्ययन से ज्ञात होता है की ,यह अवश्य ही कोई बहुत ही स्वादिष्ट पेय है। हमारे बहुत से भाई जो की मदिरासेवन करते है वे अक्सर उदाहरण देते रहते है की देवता भी मदिरा का पान ‘सोमरस ‘ के रूप में किया करते थे परन्तु हम आपको बात आपको बता दे की ऐसा बिल्कुल भी नही है ,सोमरस , मदिरा से पूरी तरह से अलग है और यह कोई मादक पदार्थ नही है ,अगर आप नही जानते है की सोमरस क्या है और यह कहा और कैसे बनाया जाता है तो आईये हम आपको बताते है सोमरस की विस्तृत जानकारी…….

ग्रंथो के अनुसार जब सूर्य पुत्र अश्विनी कुमारों ने एक लंबे समय तक ब्रह्मा जी की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया तब ब्रह्मा जी ने उन्हें सोमरस का अधिकारी बनाया, जो शक्तिवर्द्धक, आयुवर्द्धक और चिरयुवा रखने में सक्षम था ,वराह पुराण के में सोमरस प्राप्ति का प्रमाण और उसके पान के बारे में बताया गया है । इसे सिर्फ देवता को दिया गया था, जो भी व्यक्ति देवत्व की प्राप्ति कर लेता था, उसे यज्ञ के बाद सोमरस का पान करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है |

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोमरस मदिरा या कोई मादक पदार्थ नहीं है। हमारे वेदों में सोमरस का विस्तृत विवरण मिलता है। विशेष रूप से ऋग्वेद में तो कई ऋचाएं विस्तार से सोमरस बनाने और पीने की विधि का वर्णन करती हैं। हमारे धर्मग्रंथों में मदिरा के लिए मद्यपान शब्द का उपयोग हुआ है, जिसमें मद का अर्थ अहंकार या नशे से माना गया है। इससे ठीक अलग सोमरस के लिए’सोमपान’ शब्द का उपयोग हुआ है, जहां सोम का अर्थ शीतल अमृत बताया गया है।

मदिरा के निर्माण में जहां अन्न या फलों को कई दिन तक सड़ाया जाता है, वहीं सोमरस को बनाने के लिए सोम नाम के पौधे को पीसने, छानने के बाद दूध या दही मिलाकर लेने का वर्णन मिलता है। इसमें स्वादानुसार शहद या घी मिलाने का भी वर्णन मिलता है। इससे प्रमाणित होता है कि सोमरस मदिरा किसी भी स्थिति में नहीं है।

अब हम आपको बताते है की सोमरस जैसा अद्भत पदार्थ का पौधा आखिर होता कैसा है और यह कहा मिल सकता है | माना यह जाता है कि सोम का पौधा पहाडि़यों पर पाया जाता है, राजस्थान के अर्बुद, उड़ीसा के हिमाचल, विंध्याचल और मलय पर्वतों पर इसकी लताएं पाए जाने का उल्लेख मिलता है। कई विद्वान मानते हैं कि अफगानिस्तान में आज भी यह पौधा पाया जाता है, जिसमें पत्तियां नहीं होतीं और यह बादामी रंग का होता है। यह पौधा बेहद दुर्लभ है क्योंकि इसकी पहचान करने में सक्षम प्रजाति ने इसे सबसे छुपाकर रखा था।

समय के साथ साथ सोम के पौधे को पहचानने वाले अपनी मृत्यु को प्राप्त होते गए और इसकी पहचान और भी मुश्किल और कठिन होती चली गई। माना जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनि यज्ञ में सोमरस की आहूति देते थे और फिर प्रसाद रूप में इसे ग्रहण करते थे इस कारण उनका शरीर हमेशा स्वस्थ और सुन्दर रहता था । ऋग्वेद के अनुसार सोमरस के गुण संजीवनी बूटी की तरह हैं। यह बलवर्द्धक पेय है जो व्यक्ति को चिर युवा रखता है। इसे पीने वाला अपराजेय हो जाता है। ऋग्वेद में इसे बहुत ही मीठा और स्वादिष्ट पेय बताया गया है। साथ ही गुणों की तीव्रता के कारण इसे कम मात्रा में लिए जाने को भी सूचित किया है |

सोमरस भी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित एक दुर्लभ पेय है, जिसमें शरीर को महाबलशाली बनाने के सर्वश्रेष्ट गुण हैं। सोम नामक दुर्लभ पौधे को आसानी से प्राप्त नही किया जा सकता इसलिए , इसे देवताओं के लिए सीमित किया गया है | सोमरस जैसा दिव्य पेय शायद ही कहि होगा अगर आज मिल सके तो आधुनिक चिकित्सा पद्धति हजारो साल आगे चली जाएगी ,और कितने ही गंम्भीर रोगों को सही किया जा सकेगा जो की आज तक संभव नहीं था |

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