शिक़वा शायरी shikwa-shayari Hindi

हमसे कहा होता…

औरों से कहा तुमने… औरों से सुना तुमने,
कभी हमसे कहा होता कभी हमसे सुना होता।

खबर क्यों रखते हो…

रिश्ता नहीं रखना तो हम पर नज़र क्यों रखते हो,
जिन्दा हैं या मर गए तुम ये खबर क्यों रखते हो..?

चाहा था तुम्हें…

तुम मेरे लिए अब कोई इल्जाम न ढूँढो,
चाहा था तुम्हें एक यही इल्जाम बहुत है।

धोखा न दिया हमने…

किरदार की अज़मत को गिरने न दिया हमने,
धोखे तो बहुत खाए लेकिन धोखा न दिया हमने।

बिछड़ना कबूल है…

दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,
मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है।