शरद पूर्णिमा स्पेशल : आज रात करेंगे ये उपाय, तो अमृत के साथ बरसेगी लक्ष्मी की कृपा

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देशभर में शनिवार यानी 15 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा सोलह कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है, इसलिए इस रात में खीर को खुले आसमान में रखा जाता है और सुबह उसे प्रसाद मानकर खाया जाता है।


कहते है शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इस दिन माता महालक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।


कैसे लगाएं खीर का भोग?


इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से लक्ष्मीनारायण का पूजन करें और रात में खीर बनाकर उसे रात में आसमान के नीचे रख दें ताकि चंद्रमा की चांदनी का प्रकाश खीर पर पड़े। दूसरे दिन सुबह स्नान करके खीर का भोग अपने घर के मंदिर में लगाएं कम से कम तीन ब्राह्मणों या कन्यायों को खीर प्रसाद के रूप में दें और फिर अपने परिवार में खीर का प्रसाद बांटें। इस प्रसाद को ग्रहण करने से अनेक प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है।


यह है वैज्ञानिक कारण…


शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा हमारी धरती के बहुत करीब होता है, इसलिए चंद्रमा के प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे-सीधे धरती पर गिरते हैं। खाने-पीने की चीजें खुले आसमान के नीचे रखने से चंद्रमा की किरणें सीधे उन पर पड़ती है, जिससे विशेष पोषक तत्व खाद्य पदार्थों में मिल जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए अनुकूल होते हैं।


शरद पूर्णिमा पर बना महा त्रियोग…


इस बार शरद पूर्णिमा 15 अक्टूबर 2016 शनिवार को होने से रवि योग, गुरु-चन्द्रमा की परस्पर पूर्ण दृष्टि होने से बना है। गजकेशरी योग व गुरु-चन्द्रमा के आमने-सामने होने से बना। समसप्तक योग इस प्रकार तीन योगो का संयोग बन रहा है। त्रियोग होने के साथ ही पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण रहेगा। इसलिए अमृत की बरसात होगी! इस योग में नए व्यापार की शुरुआत भूमि, भवन, वाहन खरीदना, खरीदना, सोना, चांदी या कोई भी धातु खरीदना अत्यंत शुभ रहेगा।


लक्ष्मी प्राप्ति के लिएकरेंजागरण…


कहा जाता है कि इस रात माता लक्ष्मी रात्रि में यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जाग रहा है महालक्ष्मी उसका कल्याण करती हैं। कहा जाता है इसी रात के बाद से मौसम बदलता है और सर्दी के मौसम का आगमन होता है। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए व्रत के साथ ही जो इस दिन जागरण करते हैं, उउनके धन-संपत्ति में आशातीत वृद्धि होती है। रात को चन्द्रमा को अध्र्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए। इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए।

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