यहां लड़कियों को शादी से पहले संबंध बनाने की इजाजत होती है . …

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म एमएसजी-2 में आदिवासियों को शैतान बताने से बड़ा विवाद पैदा हो गया है। छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे राज्यों में तो फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लग गई है। दरअसल, आदिवासी उन लोगों को कहा जाता है, जिसका उस भौगोलिक क्षेत्र से सबसे पुराना संबंध हो। 

ये अादिवासी कई सालों से प्रकृति को संभालते और सहेजते आ रहे हैं। देश के सभी आदिवासी समाज में इतनी खूबियां हैं, जो तथाकथित आधुनिक समाज में भी कम ही देखने को मिलती है। कई आदिवासी समाज में महिलाओं को अपना जीवन साथी चुनने की पूरी आजादी दी जाती है।

गजब दुनिया आपको बता रहा है मप्र आैर छत्तीसगढ़ में रहने वाले आदिवासी समुदायों के बारे में ऐसे रिवाज,जो मुख्य धारा के समाज में भी देखने को नहीं मिलते हैं। इसमें लड़कियों को प्रेम विवाह करने से लेकर दूसरी शादी करने की अाजादी भी शामिल है। यहाँ पोस्ट भास्कर.कॉम से प्रेरित है !
gajab dunia, gajabdunia,hindi me news, hindi me jankri , bharat ke baren me , gazabpost, gajabduniya, gajab duinya,

1. यौन संबंध बनाने का मतलब लड़का-लड़की शादी के लिए राजी :

बैगा समाज में महिलाओं को बहुत सम्मान दिया जाता है। लड़के-लड़कियों को प्रेम विवाह की आजादी दी जाती है। युवतियां खुद अपना जीवनसाथी चुनती हैं। इनमें शादी से पहले यौन संबंध बनाने पर रोक नहीं है। शारीरिक संबंध बनाने की बात माता-पिता या पंचों को पता चलती है, इसके बाद शादी कर दी जाती है।

विवाह से पहले लड़की की इच्छा से यौन संबंध जायज हैं। लड़के-लड़की को यौन संबंध बनाने की सामाजिक स्वीकृति है। संबंध बनाने का मतलब है कि वे एक दूसरे के जीवन साथी हो गए।

बैगा युवती सामूहिक नृत्य में अपने जीवन साथी का चुनाव कर लेती है। हाट-बाजारों में वे एक-दूसरे को अच्छी तरह से परख लेते हैं। फिर यौन संबंध की खबर समाज के मुखिया और सगे-संबंधियों तक पहुंच जाती है। मुखिया या दोनों के माता-पिता के बीच विवाह की बातचीत शुरू होती है।

2. एक लोटा गर्म पानी से होती हैं पवित्र :

इस जनजाति की लड़की अगर दूसरा विवाह करना चाहे, तो उस पर एक लोटा गर्म पानी डालकर पवित्र कर दिया जाता है। लड़कियां अपने पसंद के लड़के के घर में जाकर उससे शादी करने की बात भी बता सकती हैं। इनमें पूर्णविवाह और विधवा विवाह भी आम है। बैगा समाज में बहुपत्नी रखने का रिवाज है। लड़की अपनी मर्जी से दूसरा विवाह कर सकती है। विधवा विवाह में देवर का पहला अधिकार होता है, लेकिन अगर विधवा किसी और के नाम की चूड़ी पहने तो पहन सकती है।

3. पैठुल विवाह:

पसंद के लड़के से शादी करने के लिए कुंवारी लड़की अपनी इच्छा से लड़के के घर में रात के समय चुपचाप घुस जाती है। वह घर के पिछवाड़े से घुसती है और लड़के के ऊपर हल्दी, चावल छिड़क देती है। हल्दी और चावल डालने का मतलब है कि लड़की ने लड़के को पसंद कर लिया है। लड़के का पिता गांव के प्रमुख लोगों को बुलाकर इस बात की जानकारी देता है कि अमुक लड़की हमारे घर में पैठुल हो गई।

इसके बाद लड़की को बुलाकर उसकी इच्छा पूछी जाती है। लड़की के जेवरों की जांच की जाती है कि वह कितने जेवर पहनकर आई है फिर उसके बाद घर के आंगन में मंडप गड़ाया जाता है और तुरंत भांवर कर दी जाती है। बाद में लड़की के घर खबर भेज दी जाती है कि उनकी लड़की हमारे घर पैठुल हो गई।

लड़की का पिता अपने रिश्तेदारों के साथ लड़के वालों के घर पहुंचता है, वहां विवाह की तिथि निश्चित की जाती है। इस विवाह में लड़की वाला लड़के वाले से तीन-चार सौ रुपए खर्च वसूलता है। यदि लड़के का पिता खर्च नहीं देता है, तो लड़के को अपने ससुर के घऱ तीन साल तक रहना पड़ता है। यदि लड़के वाला पैसा दे देता है, तो विवाह बड़ी धूमधाम से हो जाता है।

4. बिरहोर जनजाति :

बिरहोर जनजाति में लड़के वालों को लड़की वालों को दहेज देना पड़ता है। दहेज के रूप में अनाज, फल, सब्जियां और वस्त्र दिए जाते हैं। इस जनजाति में उड़रिया प्रथा से प्रेम विवाह किया जाता है।

 
 प्रथा के अनुसार अगर कोई लड़का और लड़की एक दूसरे को दिल दे बैठते हैं, लेकिन उनके अभिभावक उनकी शादी के तैयार नहीं होते तो वे घर से भाग कर किसी अज्ञात स्थान पर चले जाते हैं और पति-पत्नी के रूप में रहते हैं। जब उसकी जाति के लोग उन्हें खोज लेते हैं तो उनका विवाह कर देते हैं। 
 
गांव वाले बकरा-भात खाकर उनके प्रेम को सामाजिक मान्यता दे देते हैं।

5. चूरियाही प्रथा से विवाह करती हैं विधवा महिलाएं


जब किसी महिला के पति की मौत हो जाती है तो उसका देवर या गांव का अन्य सदस्य उसे चूड़ी पहनाकर अपने घर ले जाता है। विवाह में महिला की सहमति तथा अन्य मामलों पर पंच के सामने निर्णय लिया जाता है।

Add a Comment