सैड शायरी Sad Shayari Hindi

वो खुद नहीं आता…

कभी यादें कभी आँखों में पानी भेज देता है,
वो खुद आता नहीं अपनी निशानी भेज देता है।

इस दौर में…

इस दौर में अहसास-ए-वफ़ा ढूँढने वालो,
सेहरा में कहाँ मिलते हैं दीवार के साए।

इल्जाम ना देना तुम…

कुछ रिश्तों को कभी भी नाम ना देना तुम,
इन्हें चलने दो ऐसे ही इल्जाम ना देना तुम,
ऐसे ही रहने दो तुम तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में,
कि अल्फ़ाज़ों को मेरे अंज़ाम ना देना तुम।

दरिया से प्यासा निकला…

तिश्नगी जम गई पत्थर की तरह होंठों पर,
डूब कर भी तेरे दरिया से मैं प्यासा निकला।

मंजिल भी उसी की थी…

मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफिला भी उसका था,
साथ साथ चलने की कसम भी उसी की थी,
और रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था।