इस बार की राखी पर लगा है ग्रहण , शुभमुहूर्त में राखी बंधना ही होगा लाभकारी , जानिए शुभमुहूर्त …..

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
“जिस रक्षासूत्र से शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधती हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)”प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है | हर बार इस पर्व पर बहना अपने भाई को रखी बांध कर उसकी रक्षा और सफलता के लिए प्रार्थना करती है | परन्तु भाई बहन के इस पवन पर्व पर इस बार संकट के बादल छाए है | ऐसा प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार संयोग बनता है की राखी को ही ग्रहण लग जाए | चंद्र ग्रहण के कारण इस वर्ष 7 अगस्त को होने वाली राखी मात्र 18 मिनिट की ही होगी। इस 18 मिनिट में भगवान की पूजा कर राखी बांध लेनी ही सही है। इसलिए सूतक लगने से पहले भद्रा का असर रहेगा। इस बार राखी को बांधने के भी कुछ खास मुहूर्त बताए गए हैं, जिनमें राखी बांधना श्रेष्ठ रहेगा। रात में चंद्र ग्रहण है जिसके कारण 12 घंटे पहले ही सूतक लग जाएगा। मंदिरों के पट बंद रहेंगे और पूजा नहीं होगी। सूतक लगने के बाद सिर्फ मंत्र का जाप किया जा सकता है इसके अलावा अन्य कोई शुभ कार्य नहीं हो सकता। इस वर्ष मकर राशि पर ग्रहण लग रहा है।

गज़ब दुनिया
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राखी बांधने का श्रेष्ठ समय
समय श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को भद्रारहित व तीन मुहूर्त से अधिक उदयकाल व्यापिनी पूर्णिमा के अपराह्न या प्रदोष काल में रक्षा बंधन का शास्त्रसम्मत विधान है| इस साल 7 अगस्त, 2017 सोमवार को पूर्णिमा तिथि रात्रि 11बजकर 41मिनट तक होने से रक्षा बंधन का त्यौहार इसी दिन मनाया जाना है| रक्षाबंधन में भद्रा को वर्जित माना गया है| इस दिन पूर्वाह्न 11-05 बजे तक भद्रा व्याप्त है, इसके अतिरिक्त रात्रि 10-53 से मध्यरात्रि 12-48 तक चन्द्र ग्रहण भी है | जिसका सूतक दोपहर के बाद 01-53 से प्रारंभ हो जायेगा | अतः इस दिन राखी बांधने का श्रेष्ठ समय पूर्वाह्न 11बजकर 05मिनट से ग्रहण से सूतक से पूर्व दोपहर के बाद 01-53 तक है| रक्षाबंधन में चौघडिया या लग्नशुद्धि का विचार नही किया जाता | यहाँ धार्मिकजनों के ज्ञान में एक बात और भी लाना चाहते है | अनेक राज्यों/क्षेत्रों में तो ग्रहण के सूतक का भी विचार नही किया जायेगा। रक्षाबंधन पर्व को एक सुनिश्चित एवं नियतकाल में करने की शास्त्राज्ञा है, उस दिन सक्रांति/ ग्रहण निषेध का विचार नही होगा | ऐसी स्थिति में वहां रक्षाबंधन भद्रोत्तर दोपहर बाद 01-53 से सायं 04-34 के मध्य रक्षाबंधन होगा | वहां अपराह्न व प्रदोषकाल का निर्वाह होगा

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