राजा रवि वर्मा (1848 -1906) की कला के अद्भुत नमूने

राजा रवि वर्मा ने भारत में चित्रकला की विधा को एक नया आयाम दिया। उन्होंने अधिकतर पेन्टिंग्स हिन्दू धर्मग्रन्थों और महाकाव्यों पर बनाए। उनकी पेन्टिंग्स में हिन्दू मिथकों का बहुत ही प्रभावशाली इस्तेमाल दिखता है।

राजा रवि वर्मा ने मदुरै के चित्रकार अलाग्री नायडू तथा विदेशी चित्रकार थियोडोर जेंसन से चित्रकला की बारीकियों को सीखा। यही वजह है कि उनकी कला में यूरोपीय शैली की झलक भी मिलती है। यहां हम राजा रवि वर्मा के उन पेन्टिंग्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अनमोल हैं।

 

1. देवी सरस्वती



2. केरल की एक महिला



पहली बार देवी-देवताओं को तस्वीरों में उकेरने वाले राजा रवि वर्मा ने भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के के जीवन में भी अहम भूमिका निभाई थी.

3. दमयन्ती



4. राधा

कहते हैं कि किसी भी शख्सियत का मूल्यांकन दुनिया को सौंपी उसकी विरासत से होता है. सामान्य से सामान्य जन को यदि लगे कि वह शख्स न होता तो उसका जीवन थोड़ा कम बेहतर होता तो ऐसा शख्स ही शख्सियत बन जाता है. राजा रवि वर्मा ऐसी ही शख्सियत थे. कहने को तो वे ‘राजा’ थे लेकिन उनके पास कोई राज्य न था. उनके नाम में जुड़ा यह शब्द एक उपाधि थी जो तत्कालीन वायसराय ने उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए उन्हें दी थी.

5. कादम्बरी

अति-प्रतिभाशाली रवि वर्मा की लोकप्रियता का आलम यह था कि टीवी और इंटरनेट न होने के बावजूद वे घर-घर में वह मशहूर थे. हालांकि तमाम दूसरी हस्तियों की तरह उन्हें एक तरफ अपार लोकप्रियता नसीब हुई तो दूसरी ओर बदनामी और विवाद भी झेलने पड़े. लेकिन रवि वर्मा का काम और उनकी कल्पनाशीलता इन सबसे बेपरवाह चित्रकला को नई बु​लंदियां बख्शती रही. चित्रकारी में उन्होंने कई ऐसे प्रयोग किए जो भारत में तब तक किसी ने नहीं किए थे.

6. कारागृह में कंस और माया



7. वनवास में राम



8. कौरव सभा में द्रौपदी



9. सीता हरण



10. शकुन्तला

केरल के किलिमानूर में पैदा हुए राजा रवि वर्मा के चाचा भी कुशल चित्रकार थे. कहते हैं कि चाचा से ही उन्हें पेंटिंग का चस्का लगा. रवि वर्मा करीब 14 साल के थे तब उनके चाचा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें त्रावणकोर के राजमहल पेटिंग सिखाने ले गए. उस समय त्रावणकोर महाराज के दरबार में वाटर पेंटिंग के महारथी रामास्वामी नायडू से उन्होंने चित्रकारी के गुर सीखे. जल्द ही रवि वर्मा वाटर पेंटिंग के उस्ताद बन गए.

11. उर्वशी और राजा पुरूरवा



12. अर्जुन और सुभद्रा

हालांकि दुनिया में उन्हें ख्याति मिली अपने तैल चित्रों या आॅयल पेंटिंग्स की वजह से. उनकी तमाम मशहूर रचनाएं आॅयल पेंटिंग से ही बनीं. चित्रकला की इस शैली में रंग निखर कर आता है और इसे सालों तक सुरक्षित रखना संभव होता है. आलोचक भी मानते हैं कि उनके जैसी ऑयल पेंटिंग बनाने वाला दूसरा चित्रकार इस देश में आज तक नहीं हुआ.

13. मरघट में राजा हरिश्चन्द्र



14. कृष्ण और यशोदा

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