ससुर के सामने बहू पेट फुलाए, मैक्सी पहने घूमे, अच्छा लगता है क्या?

0
11159

मुश्किल नहीं ‘कुछ है’ का मतलब समझना. फलाने की बिटिया घर आई हुई है क्योंकि ‘कुछ’ होने के दौरान ज्यादा काम करना अच्छी बात नहीं. लेकिन ससुराल में रहकर काम नहीं करेगी तो अच्छा नहीं लगेगा. फिर ये भी तो अच्छा नहीं लगेगा कि ससुर के सामने मैक्सी पहनकर, पेट फुलाकर घूमे. इसलिए फलाने की बिटिया मायके आ गई है. सास से सेवा करवाना अच्छी बात नहीं, इसलिए उसकी मां उसका खयाल रखेगी.

अजीब सी शर्म जुड़ी है प्रेग्नेंसी के साथ. पुरानी फिल्मों के वो सीन याद आते हैं जब पत्नी पति के सामने शरमा के मुस्कुरा भर देती थी. कभी पेट पर पति का हाथ रख इशारा कर देती थी. बस समझ जाओ कि प्रेगनेंट हूं. शरमा रही हूं क्योंकि मेरी प्रेग्नेंसी से फिल्म देखने वालों को ये पता चल जाएगा कि हमने सेक्स किया था.

Loading...

हालांकि प्रेग्नेंसी छिपाने की इकलौती वजह शर्म नहीं है. कहते हैं पेट में पल रहे बच्चे को किसी की नजर न लगे, इसलिए औरत को बाहर नहीं जाने देते. किसी के सामने नहीं आने देते. जितने दिन तक बिना बताए काम चल जाए, उतने दिल चला लिया जाता. जब पेट बाहर आता तो अपने आप पता चल जाता. एक औरत दूसरे के कान में बताती, दूसरी तीसरी के. पुरुषों को उनकी पत्नियां बतातीं. मुझे नहीं लगता हमारे गांवों, या शहरों में भी अभी लोग इतने सहज हैं कि बहू टेस्ट करवाकर लौटे, और घर में आकर प्रेग्नेंसी की अनाउंसमेंट कर सके.

और प्रेग्नेंसी के माने किसी तरह की छूट नहीं. ससुराल में रहते हुए तब तक औरतें काम करती हैं, जबतक लेबर पेन न शुरू हो जाए. भारी बाल्टियां उठाती हैं, झुककर पोंछा लगाती हैं. फिर अगर लड़का हुआ तो ठीक. सास हरेरा से लेकर सोंठ के लड्डू तक, 75 तरह की चीजें खिलाती हैं. ब्राह्मण के घर पैदा हुआ हो तो ब्राह्मण भोज करवाया जाता है. बेटी हुई तो ‘ठीक है, लक्ष्मी आई है’ पर बात ख़त्म हो जाती है. डिलीवरी के बाद बहू का पुराना जीवन फिर से शुरू.

YOU MAY LIKE
Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here