यहाँ पर्यावरण को बचाने के लिए लोग करते है खुलेआम सेक्स , जानिए पूरी जानकारी

भारत बदलते परिवेश और सोच के हिसाब से पोर्न और Sex को देखने का नज़रिया भी बदलता रहा है, परन्तु आज भी भारत में इसे उतनी खुली छुट नही मिल पाई है और कोई भी इस पर किसी समूह में बात करने को तैयार नही होता जबकी यह लोगो की सबसे पसंदीदा चीजो में से एक है ,इसे मै नही कहता आज Google और YouTube पर सबसे ज्यादा Sex और पोर्न से जुड़ी बातों को सर्च किया जाता है | ऐसे तो बहुत सी पोर्न वेबसाइड भरी पड़ी है गूगल पर लेकिन एक ऐसी वेबसाइड भी है जो लोगो को सेक्स करने को उत्साहित करती है केवल और केवल मनोरंजन के लिए नही बल्कि पर्यावरण को बचाने के लिये तो आईये हम आपको बताते है इसके बारे में पूरी जानकारी …….

Sex करके पर्यावरण को बचाना~

Fuck for Forest (FFF) एक गैर-लाभकारी पर्यावरण संगठन है, जिसे साल 2004 में Leona Johansson और Tommy Hol Ellingsen ने नॉर्वे में शुरू किया था | इसके Fund एक वेबसाइट से आते हैं, जिसमें Sex के वीडियो और फ़ोटोज की भरमार है, इन्हें देखने के लिए आपको Membership लेनी पड़ती है, जिसके लिए Fee लगती है|
इस Fee का बड़ा हिस्सा Protection of rain forests में इस्तेमाल होता है,ऐसा माना जाता है कि ये दुनिया की पहली इको-पॉर्न साइट है,ये ऐसी इकलौती पॉर्न साइट है, जो अच्छे कामों के लिए पैसा कमाती है|

Website से जुड़ने के लिए देने होते हैं पैसे :

Fuck For Forest (FFF)

इस वेबसाइट के Subscribers को हर महीने लगभग 1300 रुपये देने होते हैं |इनका 80 प्रतिशत उन charities को जाता है, जो Protection of rain forests के लिए काम करती हैं|

इस वेबसाइट पर जो भी वीडियो हैं, उन्हें प्राकृतिक परिवेश में शूट किया जाता है जिसमें सभी Publicly Sex करने का काम करते हैं| पेरू, ब्राज़ील और दूसरे देशों के Rain forests को बचाने के लिए इससे मिलने वाला पैसा डोनेट कर दिया जाता है| इस वेबसाइट पर वीडियो और फोटो देखने के लिए मेंबर बनकर कुछ Fee देकर आप भी बन सकते हैं इस संस्था का हिस्सा|

Public Place पर Sex करने में इन्हें कोई बुराई नहीं लगती ~

चैरिटी के लिए करते हैं sex,
ये कार्य तब से मशहूर हुआ जब से इसके बारे में ‘Fuck For Forest’ नाम की Documentary बनायी गयी है| Michael Marczak ने इस को बनाया था|

इनके Public Sex Scandal में फंसने के बाद से, इन्हें मिलने वाली डोनेशन और बढ़ गयी है| इसे साल 2012 में रिलीज़ किया गया था| ये फिल्म पर्यावरणीय परियोजनाओं के चारों ओर घूमती है|

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