अभी अभी सुप्रीम कोर्ट ने किया बड़ा ऐलान – यदि महिला का चल रहा है किस अन्य व्यक्ति के साथ चक्कर तो ….

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नागपुर। बम्बई उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 125 (4) के मुताबिक संदिग्ध चरित्र वाली महिला पति से गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती। एक महिला दूसरे व्यक्ति से संबंध होने के बावजूद पति पर गुजारा भत्ता देने के लिए दबाव डाल रही थी और इसी मामले में बम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने यह फैसला सुनाया।

उच्च न्यायालय के मुताबिक यदि पति भरण पोषण के लिए पत्नी को रुपए नहीं देता है तो विवाहिता महिला पति से गुजारा भत्ता का दावा कर सकती है लेकिन संदिग्ध चरित्र महिला को गुजारा भत्ता नहीं मिल सकता। उच्च न्यायालय ने धारा 125 की उप धारा 4 का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि महिला के चरित्र पर प्रश्न चिह्न लगता है या वह किसी और व्यक्ति के साथ अवैध संबंध रखती है तो वे पति से गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती।

उल्लेखनीय हैं कि यदि महिला स्वयं पति से अलग रहने लगे या आपसी सहमति से पति और पत्नी अलग होते हैं तब भी धारा 125 लागू नहीं होती। हाल ही में भंडारा की सत्र कोर्ट ने एक महिला को 3000 रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था लेकिन उसके पति ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जिस पर कल सुनवाई हुई और उच्च न्यायालय ने निचली कोर्ट के आदेश को दर किनार करते हुए महिला को धारा 125(4) का हवाला देते हुए गुजारा भत्ता दिलाने की अपील ठुकरा दी।

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