अगर रास्ते में आपको भी दिख जाये शव यात्रा तो उस समय क्या करे और क्या नहीं ? इसी पर निर्भर करेगी आप की किस्मत … एक उपाय जो बदल सकता है आप की किस्मत

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जन्म और मृत्यु दो ऐसे अध्याय हैं जो एक-दूसरे पर पूर्ण रूप से निर्भर हैं और कुछ सत्य हो ना हो लेकिन जीवन के ये दो पड़ाव अटल परिस्थितियां हैं जिन्हें किसी भी रूप में टाला नहीं जा सकता. हिन्दू धर्म में ही नहीं बल्कि प्रत्येक धर्म में जन्म और मृत्यु से जुड़े अनेक रीति-रिवाज होते हैं. आज हम हिन्दू धर्म में मृत्यु और शवयात्रा से जुड़ी कुछ बातों को आपको बताने जा रहे हैं-

1. पुनर्जन्म:

जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के बाद आत्मा का पुनर्जन्म लेना भी उतना ही सत्य है. ऐसा हिन्दू धर्म के शास्त्रों में कहा गया है और साथ ही दूसरे धर्मों में भी इसकी मान्यता है कि पुनर्जन्म होता है लेकिन लोग कभी कभी इसे अस्वीकार भी कर देते हैं.

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2. मनुष्य जीवन:

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य जीवन में 16 संस्कारों का वर्णन किया गया है जिनमें जन्म से लेकर अंत्येष्टि तक हर पड़ाव शामिल है. अंत्येष्टि को जीवन का आखिरी पड़ाव होता है इसलिए इसे अंतिम संस्कार भी कहा जाता है.

3. संस्कार:
शव को अग्नि तत्व को समर्पित करने से पहले भी विभिन्न प्रकार के संस्कार निभाए जाते हैं. आज हम आपको मृत्यु के बाद से लेकर शव के अंतिम संस्कार तक निभाए जाने वाले नियमों के विषय में बताएंगे.

4. वर्ण:
वैसे तो आजकल भी इस नियम का पालन किया जाता है लेकिन पहले के दौर में इस नियम को पूरी तन्मयता के साथ निभाया जाता था कि जिस वर्ण के व्यक्ति का निधन हुआ है उसकी अर्थी को कंधा देने का अधिकार भी उसी वर्ण के व्यक्ति का होता है.

5. ब्रह्मचारी:
ब्रह्मचारी व्यक्ति ना तो अपने वर्ण के किसी व्यक्ति की अर्थी को उठा सकता था और ना ही किसी अन्य वर्ण के व्यक्ति की. वह केवल अपने माता-पिता और गुरुओं की अर्थी को ही कांधा दे सकता था.

6. ब्रह्मचर्य खंडित:
अगर वह इनमें से किसी अन्य व्यक्ति के शव को हाथ लगाता है तो उसका ब्रह्मचर्य खंडित माना जाता है. यह नियम आज भी लागू माना जाता है.

7. वस्त्र सहित स्नान:
मनुस्मृति के अनुसार जो व्यक्ति अपने ही वर्ण के व्यक्ति का शव उठाता है या उसके अंतिम संस्कार में शामिल होता है उसे वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए, नीम की पत्तियों को दांत से चबाना चाहिए, आचमन करना चाहिए और इसके बाद उसे गोबर, जल, अग्नि आदि का स्पर्श करने के बाद ही घर में स्नान करना चाहिए.

8. ब्राह्मण की अर्थी:
पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति ब्राह्मण की अर्थी उठाता है उसे अपने हर कदम पर एक यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. मात्र पानी में डुबकी लगाने से ही उसका शरीर पवित्र माना जाता है.

9. मृत व्यक्ति:

वहीं इस बात का उल्लेख भी कहीं-कहीं मिलता है कि यदि कोई ब्राह्मण किसी मृत व्यक्ति के शव को उठाता है तो वह एक माह तक अपवित्र माना जाता है लेकिन अगर कोई शूद्र वर्ण का व्यक्ति किसी ब्राह्मण के शव को उठाता है तो वह 10 दिन तक सूतक के साये में रहता है.

10. ब्राह्मण वर्ण:
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार अगर ब्राह्मण वर्ण का कोई व्यक्ति किसी अन्य ब्राह्मण के शव को अपने स्वार्थ हित के लिए या फिर पैसों के लिए उठाता है तो 10 दिनों तक वह अशुद्ध रहता है.

11. मनुस्मृति:
मनुस्मृति के अनुसार किसी भी वर्ण के व्यक्ति के शव को ले जाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि मार्ग में गांव अवश्य पड़ना चाहिए और साथ ही यह मान्यता भी है कि मृत शरीर को पीपल के पेड़ के नीचे भी रखना चाहिए.

12. गरुड़ पुराण:
वहीं गरुड़ पुराण के अनुसार उच्च वर्ण के किसी भी व्यक्ति के अंतिम संस्कार के दौरान अगर शूद्र व्यक्ति लकड़ी या फिर अन्य सामग्री को हाथ लगाता है तो उस मृत व्यक्ति की आत्मा प्रेत योनि में हमेशा के लिए भटकती रहती है.

13. भगवत गीता:
भगवत गीता में भगवान कृष्ण ने इस बात का उल्लेख किया है कि मृत्यु एक ऐसा सत्य है जिसे लाख कोशिश करने के बाद भी टाला नहीं जा सकता.

14. आत्मा:
शरीर हमेशा बदलता रहता है बस आत्मा ही अमर रह जाती है. वह समय-समय पर या कह लीजिए एक पूर्व निश्चित अवधि के बाद नया शरीर अवश्य धारण करती है.

15. अंतिम यात्रा:
मृत्यु के पश्चात शवयात्रा निकाले जाने जैसे बात हमने आपको पहले ही बता दी साथ ही साथ ये भी आपको बताया कि हिन्दू धर्म ग्रंथों में अंतिम यात्रा से जुड़े विभिन्न नियम क्या है.

16.शवयात्रा देखते ही भगवान का नाम लेना:
आपने देखा होगा कि जब भी कोई शव यात्रा निकलती है तो मार्ग में आने वाले व्यक्ति उसे देखकर प्रणाम करते हैं और शिव-शिव का उच्चारण करते हैं।

17. शास्त्रों की मान्यता:
इसके पीछे शास्त्रोक्त मान्यता यह है कि जिस मृतात्मा ने अभी शरीर छोड़ा है, वह अपने साथ उस प्रणाम करने वाले व्यक्ति के सभी कष्टों, दुखों और अशुभ लक्षणों को अपने साथ ले जाए तथा उस व्यक्ति को “शिव” यानि मुक्ति प्रदान करें।

18. ईश्वर से प्रार्थना:
ये सब जानने के बाद हम आपको एक और नियम से भी अवगत करवाना चाहते हैं. आपने देखा होगा कि जब भी कोई शव यात्रा निकलती है तो मार्ग में खड़े लोग थोड़ी देर ठहर जाते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते है.

19. लाभ की प्राप्ति:
ये नियम ऐसे हैं जिन्हें अपनाने से व्यक्ति को लाभ की प्राप्ति तो होती ही है और भटक रही आत्मा को शांति भी मिलती है।

20. मृत आत्मा की शांति:
यह हिन्दू धर्म का एक प्रमुख नियम है जिसके अनुसार शवयात्रा को देखने के बाद हमें मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए.

21. धार्मिक दृष्टिकोण:
धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा ज्योतिष की भाषा में भी शवयात्रा को देखना बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति शव यात्रा को देखता है तो उसके रुके हुए काम पूरे होने की संभावनाएं बन जाती हैं, उसके जीवन से दुख भी दूर होते हैं और उसकी मनोकामना पूर्ण होती है.

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