एक वेश्यालय पर पुलिस का ये कैसा छापा

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जर्मनी के बर्लिन शहर के सबसे बड़े वेश्यालयों में से एक पर छापे की कार्रवाई में पुलिस के 10-20 नहीं बल्कि पूरे 900 जवानों ने हिस्सा लिया।

ये छापा मानव तस्करी और टैक्स में धांधली के सिलसिले में मारा गया था। पुलिस ने कई महीनों की जांच पड़ताल के बाद आर्टेमिस वेश्यालय पर छापा मारा। वेश्यालय चलाने वालों पर वर्ष 2006 से सामाजिक सुरक्षा स्कीम का बकाया करीब दो करोड़ डॉलर नहीं भरने का आरोप है।

पुलिस के साथ कस्टम अधिकारियों और टैक्स धांधली के जांचकर्ताओं ने भी छापे में हिस्सा लिया था। सरकारी वकीलों का कहना है कि आर्टेमिस में काम करने वाले लोगों से जबरन ये छिपाने के लिए कहा जाता था कि वे वेश्यालय के कर्मचारी हैं ताकि सामाजिक सुरक्षा स्कीम का बकाया न चुकाना पड़े।

जर्मनी में वेश्यावृत्ति को वर्ष 2002 में कानूनी मान्यता दी गई थी। इसके बाद जर्मनी में वेश्यावृत्ति करीब 16 अरब यूरो सालाना आमदनी वाला व्यवसाय बन गया है। जर्मनी में ये तथाकथित ‘मेगा-ब्रॉथल्स’ आम बात हैं और पड़ोसी देशों से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं पूर्वी यूरोप से यौनकर्मी इन वेश्यालयों में काम करने के लिए आते हैं। पिछले 20 साल में यौनकर्मियों की संख्या जर्मनी में दोगुनी होकर चार लाख हो गई है।

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