मिलिए 9 वर्षीय भोपाल की मुस्कान से जो एक लाइब्रेरी चला रही है बस्ती में अन्य बच्चों को शिक्षित करने के लिए

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हमारे आस-पास कई ऐसी कहानियां और किस्से बिखरे हुए है, जो हमें यह याद दिलाते रहते हैं कि समाज और देश के प्रति भी हमारे कुछ कर्तव्य है। आज हम आपको एक ऐसी छोटी बच्ची की कहानी से रूबरू करा रहे हैं, जिसने देश का भविष्य सुनहरा बनाने के लिए एक छोटी सी शुरुआत की है।

भोपाल के सलम्स (झुग्गी) में रहने वाली मुस्कान तीसरी में पढ़ने वाली एक 9 साल की बच्ची है, जो स्कूल से आने के बाद अपने घर के बाहर एक छोटी-सी लाइब्रेरी चलाती है।

मुस्कान की इस लाइब्रेरी में कहानियों की कई किताबें हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए स्लम में रहने वाले बच्चे और किताब प्रेमी आते हैं। कुछ लोग इन किताबों को अपने घर भी ले जाते हैं।

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मुस्कान की इस लाइब्रेरी को State Education Board का साथ मिला हुआ है, जिसने इसे ‘बाल पुस्तकालय’ के रूप में भी मान्यता दी है।

मुस्कान की इस पहल से जहां कई लोगों में पढ़ने की ललक पैदा हुई है। वहीं यह लाइब्रेरी गांधी जी के साक्षर भारत के सपने को भी पूरा करती है।

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