यंहा दुर्योधन ने पांडवों के लिए बनवाया था लाक का महल

महाभारत हिन्दू धर्म का एक ऐसा महाकाव्य हैं , जिसके बारे में सबसे ज्‍यादा चर्चा की जाती है. और जब महाभारत की चर्चा की जाये और लाक्षागृह का जिक्र नहीं हो ऐसा केसे हो सकता हे . इस काव्‍य से जुड़ी हुई कई मान्यताओं और धारणाये हे, महाभारत एक ऐसा महाकाव्य हे जिसमे कई रहस्‍य छिपे हुए हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी हे .महाभारत युद्ध क्यों हुआ , केसे हुआ , कहा हुआ, और किनके बीच हुआ , कौन-कौन मारा गया, इनके बारे में लगभग हम सब जानते है. बात उस समय की थी जब युधिष्ठिर को राज्य का युवराज घोषित किया गया था , तो दुर्योधन और कोरवो को ये बात हजम नहीं हुई और मामा शकुनी के बहकावे में आकर उन्होंने पांडवों के खिलाफ एक षड़यंत्र रचा और उनको को मारने के लिए लाक्षागृह का निर्माण करवाया .

 षड़यंत्र के अनुसार कोरवो ने छल से माता कुंती के साथ पांडवों को मेले में जाने के लिए कहा और उनके विश्राम करने की व्यवस्था लाक्षागृह में की गयी . ताकि उचित समय देख कर लाक से बने लाक्षागृह में आग जला कर माता कुंती के साथ पांडवों को मोत के घाट उतार सके. लेकिन कहते हे की ” जिनको राखे साईं उनको मार सके ना कोई ” श्री कृष्ण के परम भक्त और दासी पुत्र विदुर जिनको दिव्य दृष्टि प्राप्त थी, उन्होंने समय रहते हुए पांडवों को इस षड़यंत्र के बारे में सूचित कर दिया और इस तरह से पांडव उस लाक्षागृह से जीवित बाहर निकल गए थे .

हालाँकि लाक्षागृह तो जलकर खाक हो गया था लेकिन आज भी वो जगह मौजूद है, जहां दुर्योधन और कोरवो ने लाक के लाक्षागृह का निर्माण किया था.

आज हम आपको उसी जगह के के बारे में बताने जा रहे हैं. यह जगह उत्तराखंड में स्थित है, जो देवभूमि के नाम से भी प्रसिद्ध है,

लाखामंडल की पौराणिक गुफा, जहां महाभारत काल में पांडवों को एक नया जीवन मिला था.

सुन्दर वादियों और प्राकृतिक सुंदरता से लबा- लब तथा यमुना नदी के किनारेमें बसा लाखामंडल गांव है. यह स्थान देखने में बेहद ही खूबसूरत और आकर्षित करने वाला हे , तथा भगवान भोले बाबा के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ भी है.
इतिहासकारों के अनुसार गाव के इस मंदिर और इसके आस-पास का क्षेत्र, महाभारत काल के लाक्षागृह प्रकरण से सम्बंधित है. उस समय दुर्योधन और कोरवो ने लाक से लाक्षागृह को बनवाया था ताकि वे माता कुंती के साथ पांडवों को जिंदा जलाने के अपने षड़यंत्र में सफल हो सके . महाभारत के अनुसार, जब लाक्षागृह को जला दिया गया था, लेकिन विदुर की सहायता से पांड्वो ने एक गुप्त सुरंग की मदद से अपने प्राणों की रक्षा की थी. ऐसा माना जाता हे की वह सुरंग एक गुफा के मुह पर जा कर खुलती है, जो अभी भी लाखामंडल में मौजूद है.

इस पवित्र देव भूमि को महाभारत काल से जोड़ा जाता है यहां स्थित भगवान भोले बाबा के मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यहां प्रार्थना करने से व्यक्ति को पाप – दोषों से मुक्ति मिल जाती है. इस मंदिर में ग्रेफाइट से बना शिवलिंग है जो मुख्य आकर्षण का केन्द्र हे तथा इसकी एक और विशेषता यह है कि जब इसका जलाभिषेक किया जाता है, तो यह चमकता है और इसमें जलाभिषेक कर रहां भक्त अपना प्रतिबिंब भी देख सकता है. ऐसी मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना अज्ञातवास के समय धर्मराज युधिष्ठिर और पांड्वो ने की थी.

मुख्य मंदिर के बगल में द्वारपाल के रूप में दानव और मानव को दर्शाती दो मूर्तियां स्थित हैं, कुछ लोगो का ऐसा भी मानना हे की ये मूर्तियां भीम और अर्जुन की हैं. इन मूर्तियों के लिए यह बात कही जाती है कि मरे हुए आदमी का शरीर अगर इनके पास रख दिया जाए, तो वह कुछ समय के लिए जीवित हो जाता है.

भारत एक ऐसा देश हे जहा कई ऐसे स्थान मौजूद हैं, जो हिन्दू धर्म के महाकाव्यों से जुड़े प्रसंगों से सम्बन्ध रखते हैं. वैसे ही लाखामंडल भी देखने लायक जगह है. तो आप भी एक बार यहाँ जरुर जाइये .

Source: topyaps

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