जानिए लंकापति रावण के बारे में 8 अनसुनी अच्छी बातें

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सदियों से बच्चों के नाम ‘राम’ के नाम पर जरूर मिलेंगे लेकिन अपने बच्चों का रावण नाम कोई नहीं रखता। भले ही रावण में कई बुराइयां हों लेकिन रावण विद्वान था। इस बात हम नहीं बल्कि पौराणिक तथ्य कहते हैं जिनमें रावण की बुराईयों के साथ अच्छाइयों पर भी प्रकाश डाला गया है।


 

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार रावण कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ ही कुशल सेनापति, वास्तुकला में प्रवीण, संगीत का ज्ञान रखने वाला था। वह मायावी था। वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और भी उस समयमौजूद लगभग हर जादू को भी जानता था।

रावण ने अंगूठे के मूल में चलने वाली धमनी को जीवन नाड़ी बताया है, जो सर्वांग-स्थिति व सुख-दु:ख को बताती है।

जैन शास्त्रों में रावण को प्रति‍-नारायण माना गया है। जैन धर्म के 64 शलाका पुरुषों में रावण की गिनती की जाती है।

रावण बहुत बड़ा शिवभक्त था। उसने ही शिव की स्तुति में तांडव स्तोत्र लिखा था। रावण ने ही अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी।

रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना के साथ ही कई तंत्र ग्रंथों की रचना की। कहते हैं लाल किताब (ज्योतिष का प्राचीन ग्रंथ) भी रावण संहिता का अंश है। रावण ने यह विद्या भगवान सूर्य से सीखी थी।

कहते हैं जब श्रीराम, रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर रहे थे तब उन्होंने रावण को पूजा करवाने के लिए आमंत्रित किया रावण माता सीता को पुष्पक विमान में साथ लेकर आया श्रीराम और सीता को साथ बैठाकर उसने भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को स्थापित करवाया और पुनः सीता जी को लेकर लंका चला गया था।

वाल्मीकि रामायण और रामचरित रामायण में रावण का वर्णन मिलता ही है लेकिन आधुनिक समय में आचार्य चतुरसेन द्वारा रावण पर ‘वयम् रक्षामः’ नामक बहुचर्चित उपन्यास लिखा गया है। इसके अलावा पंडित मदनमोहन शर्मा शाही द्वारा तीन खंडों में ‘लंकेश्वर’ नामक उपन्यास भी पठनीय है।

रावण ने असंगठित राक्षस समाज को एकत्रित कर उनके कल्याण के लिए कई कार्य किए। रावण के शासनकाल में जनता सुखी और समृ‍द्ध थी। सभी नियमों से चलते थे और किसी में भी किसी भी प्रकार का अपराध करने की हिम्मत नहीं होती थी।

चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र में रावण के दो ग्रंथ चर्चित हैं पहला है दस शतकात्मक अर्कप्रकाश, दूसरा है दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र, तीसरा है कुमारतंत्र और चौथा ग्रंथ है नाड़ी परीक्षा। रावण के ये चारों ग्रंथ अद्भुत जानकारी से भरे हैं।
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