यह है भारत का ऐसा मंदिर जहाँ सूरज ढलते ही इंसानों का जाना हो जाता है बंद,जानिए क्या है इसके पीछे जुडी अवधारणा

किराडू टेम्पल – भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है.भारतीय लोग मंदिर जाना शुभ मानते हैं और ये उनके दैनिक काम में से एक है.हर सुबह  मंदिर और शाम को घर लौटने के बाद मंदिर जाने की प्रथा आज भी देखी जाती है. शहर हो या गाँव रास्ते में अगर कोई मंदिर पड़ गया तो उसके सम्मान में शीश झुकाना आज भी हर भारतीय करता है.

 

 

लेकिन इसी देश में एक ऐसा भी मंदिर है जहाँ पर रात में जाने की अनुमति नहीं है.आखिर ऐसा क्या है इस मंदिर में की लोग रात में नहीं जाते. बड़ी ही अजीब कहानी है इस रहस्य के पीछे. हिन्दुस्तान की एक अद्भुत विरासत है किराडू टेम्पल. ये मंदिर राजस्थान के बाड़मेर से करीब 30 किलोमीटर दूर छोटा से कस्बे में है.इस कस्बे का नाम भी इसी मंदिर के नाम पर रखा गया है.

 

किराडू 11वीं शताब्दी तक परमार वंश की राजधानी हुआ करता था, लेकिन आज किराडू के नाम से ही लोगों के दिल की दहशत फैल जाती है. कोई यहाँ जाना नहीं चाहता, वजह ये मंदिर है.आखिर इस मंदिर में ऐसा है क्या? असल में कुछ लोग मानते हैं की इस मंदिर में जाने से लोग पत्थर के बन जाते हैं. इसलिए यहाँ कोई नहीं जाता. देश की जिस धरोहर पर सैलानियों की भीड़ होनी चाहिए, उसके वीरान रास्ते एक ही सवाल गूंजता है कि क्या वाकई कोई मंदिर भी श्रापित हो सकता है?

किराडू टेम्पल से जुड़ी सदियों पुरानी किवदंतियां आज भी कायम हैं. वो किवदंतियां जो 900 सालों से इस विरासत पर एक कलंक बनी हुई हैं. यहाँ लोग इसी डर से नहीं जाते की कहीं वो भी पत्थर के न बन जाएं.

 

किराडू टेम्पल को लेकर आसपास के गाँव वाले कई तरह के किस्से सुनाते हैं.उसमें से एक किस्सा बहुत बार लोगों के मुंह से सुनने को मिला है. किराडू मंदिर के बारे में तमाम किस्से सुनाए जाते हैं, जिन पर भरोसा करना किसी के लिए बेहद मुश्किल भरा काम था. पास के गांव के रहने वालों के  मुताबिक मंदिर के पास पड़ा पत्थर एक कुम्हारिन का है, जो साधु का श्राप भुगत रही है.

यानी साधु के श्राप के कारण वो महिला पत्थर बन गई थी. इस पत्थर की मूर्ति को देखकर ही लोग मंदिर के अंदर नहीं जाते.

 

किराडू टेम्पल इकलौता मंदिर होगा जहाँ अँधेरा होते ही दीये नहीं जलाए जाते, बल्कि इसके आसपास लोग जाने से भी डरते हैं. इसके कई किलोमीटर तक लोग नहीं जाते. जैसे ही शाम होती है यहाँ की सारी वास्तुकलाएं तालों में जकड़ दी जाती हैं.

इस किवदंति के साथ कि सूरज ढलने के बाद यहां इंसानों का जाना मना है. कहते हैं कि अंधेरा होने के बाद यहां जो भी रुका, वो पत्थर का बन गया. जी हां, लोगों का मानना है कि यहां मौजूद तमाम पत्थर, कभी इंसान हुआ करते थे. वो इंसान, जिन्होंने बीते समय में कभी मंदिर के कायदे-कानून को चुनौती देने की जुर्रत की थी. अब इस तरह की कहानी सुनने के बाद भला कौन मंदिर के अंदर जाएगा.वैसे किराडू टेम्पल को देखकर लगता है की इसके अंदर प्रवेश किया जाए, लेकिन इसी डर से लोग वहां नहीं जाते.