जानिए आखिर कैसे हुआ भगवान शिव का जन्म , गज़ब की जानकारी

भगवान शिव शंकर, भोलेनाथ बहुत ही मनमोहक स्वरूप में है | भगवान शिव को ‘संहारक’ और ‘नव का निर्माण’ के देवता माना गया है |हम सभी भगवान शिव और उनसे जुड़ी कितनी ही कथाएं सुनते रहते है | उसी अनुसार भगवान शिव को हम सभी जानते है परन्तु आपने कभी भी आज तक भगवान शिव के जन्म के बारे में नही सूना होगा | आज हम आपको बतायेंगे भगवान शिव के जन्म के बारे में वह भी हमारे पुराणों के अनुसार …..

शिव के जन्म लेने के पीछे विष्णु पुराण की एक पौराणिक कथा है। इसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न था तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव के सिवा कोई भी देवी-देवता या प्राणी नहीं था। उस समय केवल भगवान विष्णु ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे। तब उनकी नाभि से कमल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा-विष्णु जब सृष्टि के संबंध में कुछ विचार विमर्श कर रहे थे तो शिव जी प्रकट हुए ।

ब्रह्माजी ने उन्हें पहचानने से साफ इन्कार कर दिया, तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने भगवन ब्रह्मा को दिव्य दृष्टि प्रदान कर शिव की याद दिलाई। ब्रह्माजी को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार की और उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया। कुछ समय बाद विष्णु के कान के मैल से पैदा हुए मधु-कैटभ राक्षसों के वध के बाद जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की तो उन्हें एक बच्चे की जरूरत पड़ी और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद ध्यान आया। अत: ब्रह्मा ने तपस्या की और बालक शिव बच्चे के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए।ब्रह्माजी ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका नाम ‘ब्रह्मा’ नहीं है इसलिए वह रो रहा है,तब ब्रह्माजी ने शिव का नाम ‘रूद्र’ रखा जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’। शिव तब भी चुप नहीं हुए, इसलिए ब्रह्माजी ने उन्हें दूसरा नाम दिया पर शिव को वो भी नाम पसंद नहीं आया जिससे वे फिर भी चुप नहीं हुए। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए।

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