इस जन्माष्टमी अगर आप जाते है भगवान श्रीकृष्णा की इन पांच पसंदीदा जगहों पर तो होगी आपकी सभी मनोकामनाए पूर्ण

इस वर्ष आने वाली 15 अगस्त को हमारे बल गोपाल श्री कृष्णा का जन्मदिवस है यानि की जन्माष्टमी और हम सभी जानते है की हमारे लिए जन्माष्टमी का कितना महत्व है | यह दिन हमारे लिए दोहरी खुशियाँ लायेगा क्युकी 15 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस ‘ भी है और ‘जन्माष्टमी ; भी इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है | इसलिए हम आपको भारत में स्थित ऐसे पांच पवित्र स्थानों के बारे में बतायेंगे जिनका श्री कृष्णा से बहुत गहरा सम्बन्ध है |

1.मथुरा: मथुरा के बारे में कौन नहीं जानता बचपन में कान्‍हा कहे जाने वाले भगवान कृष्‍ण के अवतार के बारे में प्रसिद्ध है कि वो द्वापर में मथुरा में अपने मामा कंस के कारागार में अवतरित हुए थे। मथुरा, भारत के उत्‍तर प्रदेश राज्‍य में स्थित है। कृष्‍ण के जन्‍म देने वाले माता पिता देवकी और उग्रसेन थे जो कृष्‍ण की रक्षा के लिए उन्‍हें गोकुल में नंद और यशोदा को सौंप आए थे ताकि पापी कंस की उन पर नज़र ना पड़े |

गज़ब दुनिया
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2.गोकुल: जब उग्रसेन श्रीकृष्‍ण को गोकुल छोड़ आए तो उनका शैशव यहीं से प्रारम्भ हुआ। उनका पालन पोषण गोकुल में ही हुआ। मथुरा से कुछ ही दूर उत्‍तर प्रदेश में ही गोकुल नाम का छोटा सा गांव स्थित है। इस स्‍थान का ये नाम भी शायद इसीलिए पड़ा है क्‍योंकि यहां यादवो के गाय चराने वाले कुल रहा करते थे।

3.वृंदावन: कृष्‍ण कुछ ही बड़े हुए थे की नंद अपने परिवार और साथियों के छोटे से दल के साथ, जो उन्‍हें अपना मुखिया मानते थे, गोकुल से कुछ दूर वृंदावन आ गए। यहीं पर कृष्‍ण ने अपनी कई प्रसिद्ध बाल लीलायें कीं और एक ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने का चमत्‍कार भी श्री क्रष्णा वृंदावन में ही दिखाया था।

वृंदावन

4.द्वारका: समुद्र किनारे बनी द्वारका नगरी की स्‍थपना स्वयं कृष्‍ण ने ही की थी ताकि यादव वंश को जरासंध के हाथों नष्‍ट होने से बचाया जा सके। हालाकि वास्‍तविक द्वारका के बारे में तो कहा जाता है कि वो यादवों के विनाश के बाद समुद्र में डूब गयी थी परन्तु इस द्वारका को भी श्रीकृष्‍ण का परम स्‍थान माना जाता है। देव भूमि द्वारका के नाम से प्रसिद्ध ये स्‍थान गुजरात राज्‍य में आता है।

5.कुरुक्षेत्र: बिना इस स्‍थान के नाम का जिक्र किए कृष्‍ण की कथा पूरी कहा हो सकती है । हरियाणा में स्‍थित ये स्‍थान महाभारत के महायुद्ध का गवाह है और यहीं कृष्‍ण ने पाण्‍डव अर्जुन को गीता का महा ज्ञान दिया था। यही पर अधर्म पर धर्म की जीत हुयी थी |

 

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