इंतज़ार शायरी Intzaar Shayari Hindi

दहलीज़ पर आँखें…

रात देर तक तेरी दहलीज़ पर
बैठी रहीं आँखें,
खुद न आना था तो कोई
ख्वाब ही भेज दिया होता।

तरसती हैं आँखें…

उनसे मिलने को तरसती हैं आँखें,
तरस तरस कर बरसती हैं आँखें,
बरस बरस कर जब थक जाती हैं आँखें,
तो फिर से मिलने को तरसती हैं आँखें।

अब तो आ जाइये…

शाम है बुझी बुझी वक्त है खफा खफा,
कुछ हंसीं यादें हैं कुछ भरी सी आँखें हैं,
कह रही है मेरी ये तरसती नजर,
अब तो आ जाइये अब न तड़पाइये।

हम ठहर भी जायेंगे राह-ए-जिंदगी में
तुम जो पास आने का इशारा करो,
मुँह को फेरे हुए मेरे तकदीर सी,
यूँ न चले जाइये अब तो आ जाइये।

भरोसा लौट आने का…

मेरी निगाह में फिर कोई दूसरा चेहरा नहीं आया,
भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का।

तलाश आपकी…

आपकी जुदाई भी हमें प्यार करती है,
आपकी यादें भी हमे बेकरार करती है,
आते जाते यूँ ही हो जाए मुलाकात आपसे,
तलाश आपको ये नजर बार बार करती है।