कभी सोचा है कि घड़ी के विज्ञापन में समय ’10:10′ ही क्यों होता है?

कौन-से ब्रैन्ड की घड़ी पहनते हो? टाइटन, रॉलेक्स, सोनाटा या कोई और? आप कोई भी घड़ी पहनो पर एक बात बताओ घड़ी ख़रीदी है कभी? ज़रूर खरीदी होगी पर क्या आपने ध्यान दिया कभी कि घड़ी के विज्ञापन में हरदम 10 बज कर 10 मिनट और 35 सेकेंड ही क्यों होते हैं? ये तो सोचा नहीं होगा क्योंकि हमारा काम है घड़ी पहनना, खरीद कर पहन लिया अब और क्या चाहिए। यह कोई संयोग नहीं है इसके पीछे भी एक बहुत ही रोचक वजह है। तो चलिए आज़ आपको इसी बारे में बताते हैं।



1.अगर देखा जाए तो विज्ञापन में घड़ी की सुइयां जिस आकार में होती हैं वो हंसने की आकृति बनाती हैं जो एक बहुत ही सकारात्मक चिन्ह होता है। मतलब अगर एक सुई 10 पर और दूसरी 2 पर होगी तो दोनों सुइयों को मिलाकर जो आकार बनेगा वो कुछ हद तक स्माइली जैसा होगा। बहुत पहले विज्ञापनों में 8:10 का समय इस्तेमाल किया जाता था मगर उस समय से जो आकृति बनती थी उसका मनोवैज्ञानिक असर गलत पड़ता था।

2. कई कारणों में से एक कारण यह भी है कि यह समय एक ही बार में दिख जाता है ज़्यादा ध्यान से देखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। इस समय की वजह से ब्रांड का नाम और घड़ी की अन्य विशेषतायें भी आसानी से दिख जाती है। मतलब जब एक सुई 10 पर और दूसरी 2 पर हो तो ब्रांड का नाम उन दोनों के बीच आसानी से दिखता है। साथ ही दूसरे फीचर्स भी नहीं छिपते हैं।

3. एक और बात ध्यान देने वाली है कि इस समय के दौरान सेकेंड वाले कांटे को 35 सेकेंड पर रोक दिया जाता है। इसको इस तरह भी माना जाता है कि यह आकृति ‘V’ आकर बनाती है जिसे जीत का सूचक भी माना जाता है। आज कल तो लोग सेल्फी और पिक्स लेते वक्त भी V आकार में उंगलियां बनाते हैं। V का मतलब VICTORY – जीत

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