क्या आप जानते है विवाह कितने प्रकार के होते है ,जानिए शास्त्रों में विवाह के बारे में क्या कहा गया है …..

20231
Loading...

हिन्दु धर्म में सोलह संस्कारों का विशेष महत्व है। जीव की सम्पूर्ण जीवन यात्रा में ऋषि-मुनियों ने उसे अच्छे संस्कारों से संस्कारित करने के लिए उसके जन्म के पूर्व से ही अलग-अलग नियम बनाए जिससे कि वह एक आदर्श और मर्यादा पूर्ण जीवन व्यतीत करें। व्यक्ति की पहचान वस्तुतः उसके सस्कारों से ही होती है। जीवन को सुन्दर बनाने के लिए समाज में अधिकांशतः सोलह संस्कारों को ही मान्य माना गया है। यह सोलह संस्कार हैं – गर्भाधान संस्कार, पुंसवन संस्कार, सीमान्तोनयन संस्कार, जातकर्म संस्कार, नामकरण संस्कार, निष्क्रमण संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, चूड़ाकरण संस्कार, कर्मवेध संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह संस्कार, केशान्त संस्कार, वेदारम्भ संस्कार, विवाहाग्नि परिग्रह संस्कार, और अन्योष्टि संस्कार। जीवन की यात्रा में वंशवृद्धि के लिए तथा पूर्णतः अर्थात् मुक्ति के लिए विवाह को एक आवश्यक संस्कार माना गया है। शास्त्रों में विवाह के कुल आठ प्रकार बताए गए हैं-

शास्त्रों के अनुसार विवाह कितने प्रकार के होते है ,गज़ब दुनिया
शास्त्रों के अनुसार विवाह कितने प्रकार के होते है ,गज़ब दुनिया

1.ब्राह्म विवाह : हिन्दुओं में यह आदर्श, सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित विवाह का रूप माना जाता है। इस विवाह के अंतर्गत कन्या का पिता अपनी कन्या के लिए विद्वता, सामर्थ्य एवं चरित्र की दृष्टि से सबसे सुयोग्य वर को विवाह के लिए आमंत्रित करता है। और उसके साथ पुत्री का कन्यादान करता है। इसे आजकल सामाजिक विवाह या कन्यादान विवाह भी कहा जाता है।

2. दैव विवाह : इस विवाह के अंतर्गत कन्या का पिता अपनी सुपुत्री को यज्ञ कराने वाले पुरोहित को देता था। यह प्राचीन काल में एक आदर्श विवाह माना जाता था। आजकल यह अप्रासंगिक हो गया है।

शास्त्रों के अनुसार विवाह कितने प्रकार के होते है ,गज़ब दुनिया
Loading...

3. आर्ष विवाह : यह प्राचीन काल में सन्यासियों तथा ऋषियों में गृहस्थ बनने की इच्छा जागने पर विवाह की स्वीकृत पध्दति थी। ऋषि अपनी पसन्द की कन्या के पिता को गाय और बैल का एक जोड़ा भेंट करता था। यदि कन्या के पिता को यह रिश्ता मंजूर होता था तो वह यह भेंट स्वीकार कर लेता था और विवाह हो जाता था परंतु रिश्ता मंजूर नहीं होने पर यह भेंट सादर लौटा दी जाती थी।

4. प्रजापत्य विवाह : यह ब्राह्म विवाह का एक कम विस्तृत, संशोञ्ति रूप था। दोनों में मूल अंतर सपिण्ड बहिर्विवाह के नियम तक सीमित था। ब्राह्म विवाह का आदर्श पिता की तरफ से सात एवं माता की तरफ से पांच पीढ़ियों तक जुड़े लोगों से विवाह संबंध नहीं रखने का रहा है। जबकि प्रजापत्य विवाह पिता की तरफ से पांच एवं माता की तरफ से तीन पीढ़ियों के सपिण्डों में ही विवाह निषेध की बात करता है।

शास्त्रों के अनुसार विवाह कितने प्रकार के होते है ,गज़ब दुनिया

5. आसुर विवाह : यह विवाह का वह रूप है जिसमें ब्राह्म विवाह या कन्यादान के आदर्श के विपरीत कन्यामूल्य एवं अदला-बदली की इजाजत दी गई है। ब्राह्म विवाह में कन्यामूल्य लेना कन्या के पिता के लिए निषिध्द है। ब्राह्म विवाह में कन्या के भाई और वर की बहन का विवाह (अदला-बदली) भी निषिध्द होता है अन्यथा यह आसुर विवाह के अन्तर्गत आता है।

6. गंधर्व विवाह : यह आधुनिक प्रेम विवाह का पारंपरिक रूप था। इस विवाह की कुछ विशेष परिस्थितियों एवं विशेष वर्गों में स्वीकृति थी परन्तु परंपरा में इसे आदर्श विवाह नहीं माना जाता था।

शास्त्रों के अनुसार विवाह कितने प्रकार के होते है ,गज़ब दुनिया

7. राक्षस विवाह : यह विवाह आदिवासियों में लोकप्रिय हरण विवाह को हिन्दू विवाह में दी गई स्वीकृति है। प्राचीन काल में राजाओं और कबीलों ने युध्द में हारे राजा तथा सरदारों में मैत्री संबंध बनाने के उद्देश्य से उनकी पुत्रियों से विवाह करने की प्रथा चलायी थी। इस विवाह में स्त्री को जीत के प्रतीक के रूप में पत्नी बनाया जाता था। यह स्वीकृत था परंतु आदर्श नहीं माना जाता था।

8. पैशाच विवाह : यह विवाह का निकृष्टतम रूप माना गया है। यह जबरदस्ती से शीलहरण की गई लड़की के अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम विकल्प के रूप में स्वीकारा गया विवाह रूप माना गया है। इस विवाह से उत्पन्न संतान को वैध संतान के सारे अधिकार प्राप्त होते हैं।

YOU MAY LIKE
Loading...