यहाँ 90 किलो के इस पत्थर को सिर्फ ऊँगली से उछाल सकते हैं, जानिए क्या है रहष्य

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मंदिर या दरगाह में आए दिन चमत्कार होना आम बात है, लेकिन कई बार कुछ ऐसे चमत्कार होते हैं जिन पे विश्वास करना आसान नहीं होता, यहां तक का आखों देखने पर भी यकीन करना बेहद मुश्किल होता है। अगर हम आपसे पूछे की क्या आप ग्यारह लोग मिलकर अपनी तर्जनी अंगुली (कन्फ्युज हैं तर्जनी अंगुली को लेकर तो गुगल पर सर्च करलें) से 90 kg वजन के पत्थर को अपने सर तक उठा सकते है ? तो शायद आपको जवाब होगा, असंभव। लेकिन पुणे स्थित ‘बाबा हज़रत कमर अली की दरगाह’ में यह चमत्कार आप कर सकते हैं।



हजरत कमर अली दरवेश बाबा की दरगाह


चमत्कारिक हजरत कमर अली दरवेश बाबा की दरगाह पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर स्थित शिवपुर गांव में है। यहां पर आज से 700 वर्ष पूर्व सूफी संत हजरत कमर अली को दफनाया गया था। आपको बता दें हजरत कमर अली एक सूफी थे जिनका निधन मात्र 18 साल की उम्र में हो गया था। उन्हें उनकी मृत्यु के बाद संत की उपाधि से सम्मानित किया गया था।

चमत्कारिक शक्तियां आज भी विधमान


इस दरगाह में सूफी संत की चमत्कारिक शक्तियां आज भी विधमान है। इसका जीता जागता उदाहरण दरगाह परिसर में रखा करीब 90 kg का पत्थर है। इस पत्थर को यदि 11 लोग सूफी संत का नाम लेते हुए अपनी तर्जनी अंगुली (इंडेक्स फिंगर) से उठाते है तो यह पत्थर आसानी से ऊपर उठ जाता है। लेकिन यदि इस पत्थर को दरगाह से बाहर ले जाकर उठाए तो यह टस से मस भी नहीं होता है, फिर चाहे आप कितनी भी ताकत क्यों ना लगा लें।।

दरवेश बाबा का चमत्कार


भक्त लोग इसका कारण दरगाह में आज भी विधमान हजरत कमर अली दरवेश बाबा की शक्तियों को मानते है। इसके अलावा भी इस पत्थर से एक और रहस्य जुड़ा है यदि लोग तर्जनी अंगुली के अलावा कोई दूसरी अंगुली का इस्तेमाल करे या लोगों की संख्या 11 से कम या ज्यादा हो तो भी पत्थर नहीं हिलता है।

सभी धर्म, जाती और समुदाय के लोगो का तांता


इस दरगाह पर साल भर सभी धर्म, जाती और समुदाय के लोगो का तांता लगा रहता है। एक खास बात यह है की अन्य दरगाहों की तरह यहां पर महिलाओं को लेकर कोई बंदिश नहीं है। अन्य धार्मिक स्थलों की तरह यहां भी भक्तों की मान्यता है की यहां मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है।

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