क्या आप जानते है की गंगा जल कभी ख़राब नहीं होता है ? जानिए आखिर गंगा जल में ऐसा क्या है

कहते है की एक समय के बाद हर एक चीज या वस्तु ख़राब होने लगती है चाये वो खाने-पीने का सामान हो या कोई और सामान हो एक लम्बे समय के बाद वो ख़राब हो ही जाता है, लेकिन आप को सुनकर ताजुब होगा की एक ऐसी नदी भी है जिसका पानी कभी ख़राब नहीं होता है. हिन्दू धर्म में गंगा नदी को माँ का दर्जा दिया गया है और हर रोज गंगा मैया की भव्य आरती होती है, साथ ही गंगा जल की बड़ी महत्ता है .हिन्दू धर्म में व्यक्ति के मरने से पहले उसके मुह में गंगा जल डाला जाता है और अंतिम संस्कार के बाद भी अस्थियां गंगाजल में विसर्जित करने की परम्परा है. आखिर गंगा नदी को इतना पवित्र क्यों माना जाता है और गंगा जल को इतनी महत्ता क्यों दी जाती है ? क्यों गंगा जल कभी ख़राब नहीं होता है ? आइये आज आप के सभी सवालो के जवाब ढूढ़ने की कोशिश करते है.

BBC में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार :

गोमुख से निकली भागीरथी, प्रयाग में अलकनंदा से मिलती है. इतनी लम्बी दूरी तय करने के दौरान इसमें कुछ चट्टानें घुलती जाती हैं, जिससे इसके जल में ऐसी क्षमता पैदा हो जाती है जो पानी को सड़ने नहीं देती.

डॉ. आर.डी. सिंह के मुताबिक

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के निदेशक डॉ. आर.डी. सिंह के मुताबिक, गंगा नदी के जल की गुणवत्ता पर इसलिए कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि यह हिमालय पर्वत पर उगी अनेकों जीवनदायिनी जड़ी-बूटियों को स्पर्श करता हुआ आता है.

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार शर्मा के अनुसार :

डॉ. शर्मा ने बताया कि गंगा जल खराब नहीं होने के कई वैज्ञानिक कारण भी हैं. इनमें से एक यह है कि गंगा जल में बैट्रिया फोस नामक एक बैक्टीरिया पाया गया है, जो पानी के अंदर रासायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अवांछनीय पदार्थों को खाता रहता है. इससे जल की शुद्धता बनी रहती है. दूसरा कारण गंगा के पानी में गंधक की प्रचुर मात्रा मौजूद रहती है, इसलिए भी यह खराब नहीं होता.

हालांकि एक मान्यता यह भी  है कि हर नदी के जल की अपनी जैविक संरचना होती है, जिसमें खास तरह के घुले हुए पदार्थ रहते हैं जो कुछ किस्म के बैक्टीरिया को पनपने देते हैं कुछ को नहीं. बैक्टीरिया दोनों तरह के होते हैं, वो जो सड़ाते हैं और जो नहीं सड़ाते. वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि गंगा के पानी में ऐसे बैक्टीरिया हैं जो सड़ाने वाले कीटाणुओं को पनपने नहीं देते, इसलिए पानी लंबे समय तक खराब नहीं होता.

डाक्टर भार्गव के मुताबिक :

डॉ  भार्गव कहते हैं कि गंगा के पानी में वातावरण से आक्सीजन सोखने की अद्भुत क्षमता है. दूसरी नदियों के मुकाबले गंगा में सड़ने वाली गंदगी को हजम करने की क्षमता 15 से 20 गुना ज्यादा है. दूसरी नदी जो गंदगी 15-20 किलोमीटर में साफ़ कर पाती है, उतनी गंदगी गंगा नदी एक किलोमीटर के बहाव में साफ़ कर देती है.

अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस के  वैज्ञानिक ने गंगाजल पर कई बार रिसर्च कर चुके हैं और गंगाजल को लेकर वे हैरान है.

डॉक्टर सी .ई. नेल्सन के अनुसार

इंग्लैंड के फेमस डॉक्टर सी .ई. नेल्सन ने जब गंगाजल पर रिसर्च की, तो उन्होंने कहा कि इस पानी में कीटाणु नहीं होते हैं.