प्रथम विश्व युद्ध में जीत के लिए ब्रिटिश सरकार ने भारत के इस मंदिर में करवाई थी विशेष पूजा…जानिए इस मंदिर के बारे में कुछ खास बाते

वैशाखी का त्योहार पंजाब, हरियाण आदि प्रदेशों में बड़ी ही धूमधाम व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। प्रतिवर्ष यह त्योहार अप्रैल माह में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 14 अप्रैल, शनिवार को है।

यह सिक्ख धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। वैशाखी का पर्व मूलत: फसल पकने की खुशी में मनाया जाता है। इस समय गेंहूं की फसल पक कर तैयार हो जाती है।

किसान जब अपनी फसल लहलहाती देखता है, तो उसके मन में अपने आप ही उमंग और उल्लास हिलोरे मारने लगता है। इस खुशी को सभी लोग मिलकर नाच-गाकर मनाते हैं। इसी पर्व का नाम वैशाखी है। इस मौके पर हम आपको सिक्खों के सबसे बड़े आस्था के केंद्र गोल्डन टेम्पल के बारे में खास फैक्ट्स बता रहे हैं, जो इस प्रकार है-

फैक्ट-1

गोल्डन टेम्पल के निर्माण के लिए जमीन मुस्लिम शासक अकबर ने दान की थी

फैक्ट-2

इस टेम्पल की नींव साईं मियां मीर के नाम के एक मुस्लिम संत ने रखी थी

फैक्ट-3

महाराजा रंजीतसिंह ने मंदिर निर्माण के लगभग 2 शताब्दी बाद यहां की दीवारों पर सोना चढ़वाया था।

फैक्ट-4

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने जीत के लिए यहां अखंड पाठ करवाया था।

फैक्ट-5

अहमद शाह अब्दाली के सेनापति जहां खान ने इस मंदिर पर हमला किया था, जिसके जवाब में सिक्ख सेना ने उसकी पूरी सेना को खत्म कर दिया था।

फैक्ट-6

इस मंदिर में सभी धर्म के लोग आते हैं। मंदिर में चार दरवाजे चारों धर्म की एकता के रूप में बनाए गए थे।

फैक्ट-7

यहां दुनिया का सबसे बड़ा लंगर लगाया जाता है, जिसमें रोज लगभग 50 हजार लोग खाना खाते हैं।