क्या आप जानते हैं RO वाटर बन सकता है आपकी मौत का कारण, जानिए कैसे

आपने भी ज्यादा शुद्धता का पानी पीने के लिए अपने घर में आरओ लगवा रखा होगा यानि रिवर्स ओस्मोसिस वाटर प्यूरिफायर लगवा रखा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं जिस आरओ वाटर को आप शुद्ध और हेल्दी समझकर पीते हैं, ये आपको नुकसान भी पहुंचाता है। जी हां भले ही आपको यह जानकर अजीब लगे, लेकिन यह बात सच है कि आरओ वाटर कई मायनों में आपके शरीर को नुकसान भी पहुंचाता है। कारण कि यह पानी सेहत के लिए हानिकारक है। इससे आपकाे न सिर्फ नुकसान पहुंच सकता है बल्कि आपको बीमारियां भी हो सकती है।

RO पानी के उपयोगी तत्वों को नष्ट कर देता है। और तो और यह पानी को एसिडिक बना देता है। वैसे आपको बता दें कि यह तमाम बातें हम नहीं कह रहे हैं। यह कहना है डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ अॉर्गेनाइजेशन) की रिपोर्ट का।

जानकारी के मुताबिक पानी को साफ करने के दौरान RO पानी में मौजूद कैल्शियम और मेग्नेशियम को 92 से 99 फीसदी तक कम कर देता है। ऐसे में यह पानी हमारे पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव डालता है। आइए जानते हैं पूरी रिपोर्ट और ऐसे पानी के दुष्प्रभाव।

पहले जानिए मीडिया रिपोर्ट्स के बारे में


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2016 में आई एक रिपोर्ट में वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) ने चेताया था कि RO के पानी का लगातार सेवन भी मौत का कारण बन सकता है। वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि RO प्रक्रिया पानी में से बैक्टीरिया खत्म करने के चक्कर में शरीर के लिए जरूरी आवश्यक तत्व भी कम कर देती है।

जनसत्ता के अनुसार RO प्रक्रिया से गुजरने के बाद पानी एकाएक एसिडिक हो जाता है क्योंकि RO पानी में मौजूद लवणों को कम कर देता है। नतीजतन पानी एसिडिक हो जाता है।

पानी साफ करने के चक्कर में RO वॉटर में से वो तत्व भी उड़ जाते हैं जो शरीर के लिए जरूरी हैं। इनमें आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और सोडियम जैसे तत्व शामिल हैं।

RO वाटर प्यूरीफायर भी बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाता है। इस प्रक्रिया के बाद भी सूक्ष्म बैक्टीरिया बाहर नहीं निकल पाते हैं। ऐसे में RO वाटर बैक्टीरिया फ्री नहीं हो पाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘करंट साइंस जर्नल’ में अप्रैल 2015 में ‘ग्रोथ ऑफ वॉटर प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी इन एरा ऑफ रेगुलेटरी वैलकम इन इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित एक सर्वे में शोधन के बाद बचे दूषित बेकार पानी को खत्म करने के उपयुक्त तरीकों के अभाव पर भी सवाल उठाये गये। शोध में बताया गया कि भारत में बोतल बंद पानी बेचने वाली अधिकतर कंपनियां अपने प्लांट्स में RO प्रणाली का प्रयोग करती हैं। हालांकि इसमें एक दोष है। वो यह कि द्योगिक प्रयोग के दौरान कुल उपयोग किये गये पानी में 30 से 40 फीसदी पानी बेकार हो जाता है।
प्रतिबंधित है RO

साफ पानी बेहद आवश्यक है, वरना आप बीमार पड़ सकते हैं। मगर पानी इतना भी साफ नहीं होना चाहिए कि उसमें मौजूद तत्व ही नष्ट हो जाएंं। पानी सिर्फ पानी ही रह जाए।

RO सिस्टम पर प्रतिबंध 

इसी कारण एशिया और यूरोप के कई देशों ने आरओ पर पूर्ण तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि शोध से पता चला है कि आरओ का पानी लगातार सेवन करने पर हृदय संबंधी विकार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन आदि गंभीर साइड इफेक्ट पाए गए हैं।

क्या हो सकता है नुकसान

मिनरल्स हटाता है- आरओ वॉटर पानी को साफ करते हुए पानी में मौजूद उन तत्वों को भी निकाल देता है जो आपके शरीर के लिए लाभदायक होते हैं, जिसमें आइरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और सोडियम जैसे तत्व शामिल है। एक रिचर्स में सामने आया है कि लगातार इस पानी के सेवन से आपके पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है और आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती है।

एसिडिक हो जाता है पानी- आरओ प्यूरिफायर से साफ होने के बाद पानी एसिडिक हो जाता है क्योंकि आरओ पानी में मौजूद नमक अणुओं से क्षारीय खनिज परमाणुओं को हटा देता है। इससे पानी एसिडिक हो जाता है, जो कि आपके शरीर के लिए खतरनाक है। दरअसल पानी में मौजूद कार्बोनिक एसिड शरीर से कैल्शियम दूर करता है।

वायरस, बैक्टीरिया नहीं होते नष्ट- आरओ वाटर प्यूरिफायर पानी में मौजूद खतरनाक बैक्टीरियाओं को मार नहीं पाता है, क्योंकि आरओ में पानी साफ करने वाली आरओ मेम्ब्रेन छोटे-छोटे बैक्टीरिया को बाहर नहीं कर पाते। यह बैक्टीरिया पानी छानने वाली इस मेम्ब्रेन से आसानी से बाहर निकल जाते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।

पानी का नुकसान- आरओ पानी को साफ तो करता है लेकिन आरओ की पानी साफ करने वाली तकनीक से कुछ ही पानी दूसरी तरफ आ पाता है। इससे अधिकतर पानी बाहर यानि वेस्टेज के रुप में निकल जाता है। इसलिए यह पानी साफ करते हुए करीब आधा पानी वेस्ट कर देता है।

महंगा पड़ता है- आरओ वाटर पानी साफ तो कर देता है, लेकिन इसकी समय समय पर देखभाल करना जरुरी है, क्योंकि इसकी पानी साफ करने वाली मेम्ब्रेन कुछ ही दिनों में खराब हो जाती है। खास बात ये है कि इसके खराब होने का पता भी नहीं चलता है और बार-बार इसे बदलना पड़ता है।

source : jansatta