इस खतरनाक महिला जासूस ने अपनी अदाओं से किये ऐसे काम जो आप सोच भी नहीं सकते

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जासूसों के कारनामे तो हम अक्सर फिल्मों में टीवी पर देखते आ रहे हैं। कैसे वह कितनी चतुराई के साथ अपने मिशन को अंजाम देते हैं। लेकिन आज हम आपको जासूसों के कुछ रियल कारनामे बताने जा रहे हैं जो शायद फिल्मों में दिखाए गए कारनामों से भी बेहतर लगे आपको। दुनियाभर में कुछ जासूसों की कहानियां बड़ी दिलचस्प हैं। उन्होंने अपने देश की सुरक्षा के लिए जान की बाजी लगाकर दिल दहला देने वाले काम किये हैं।

जासूसों की दुनिया में माता हारी थी सबसे खतरनाक जासूस
जासूसों की दिलचस्प कहानियों में से एक रियल महिला जासूस की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं। इस महान जासूस महिला का नाम था माता हारी। इस महिला को दुनिया की सबसे खतरनाक महिला जासूस के तौर पर जाना जाता है। जानकारी के अनुसार माता हारी का जन्म 7 अगस्त 1876 को नीदरलैंड में हुआ था जो पली-बढ़ी पेरिस में थी।कहा जाता है की माता हारी का असली नाम गेरत्रुद मार्गरेट जेले था वह एक जासूस होने के साथ पेशेवर डांसर भी थीं। की खास बात यह थी की वह उस समय भारतीय नृत्य कौशल में काफी परांगत थी। वह अपने उत्तेजक डांस से लोगों अपना दीवाना बना लेती थी।

मार्गरेट जेले खुद को इग्जॉटिक डांसर मानती थी। कई देशों के शीर्ष सेना अधिकारियों, मंत्रियों, राजशाही के सदस्यों से उसके नज़दीकी रिश्ते थे। लेकिन उसका असली पेशा डांस करना नहीं, बल्कि अपने शरीर और कामुक अदाओं से बड़े लोगों की जासूसी करना था। इसके लिए वह लोगों के साथ हमबिस्तर होने से भी पीछे नहीं हटती थी।

मार्गरेट जेले का पति अव्वल दर्जे का शराबी था। वह नीदरलैंड की शाही सेना में अधिकारी था और इंडोनेशिया में तैनात था। कई बार वह अपनी पत्नी की पिटाई कर चुका था। इस दौरान जेले इंडोनेशिया में ही एक डांस कंपनी में शामिल हो गईं और अपना नाम बदलकर माता हारी कर लिया।


माता हरे का अर्थ मलय भाषा में होता है दिन की आंख यानि की सूर्य। नीदरलैंड्स लौटने के बाद 1907 में माता हारी ने अपने पति को तलाक दे दिया और पेशेवर डांसर के रूप में पेरिस चली गई।

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान माता हारी ने फ्रांस, नीदरलैंड्स और स्पेन कई बार गयी। एक बार स्पेन जाते हुए माता हारी को इंग्लैंड के फालमाउथ बंदरगाह पर बंदी बना लिया गया था।फ़्रांस और ब्रिटिस की ख़ुफ़िया एजेंसीयों ने माता हरी पर जसूसी के आरोप लगाये लेकिन उन्हें उनके खिलगफ कोई सबूत नहीं मिला। फिर भी उन लोगों ने डबल एजेंट का इल्जाम लगाकर उनको गोलियों से भुनवा दिया।

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