चाय से लेकर ट्वाय ट्रेन तक, दार्जिलिंग का सब कुछ है खास! जाने दार्जिलिंग के बारें में !

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चाय के बागानों के लिए दुनिया भर में नाम बटोरने वाले हिल स्टेशन दार्जिलिंग में और भी कई ऐसी जगहें हैं जहां का दीदार करना आपको बहुत भाएगा। वैसे तो यहां 12 महीने पर्यटक आते हैं, लेकिन गर्मियों में यहां सैलानियों की संख्या कुछ ज्यादा ही रहती है।



आज गजब दुनिया इस पोस्ट के दवारा आपको दार्जिलिंग के बारें में कुछ जानी-अनजानी बाते बताने जा रहा है – तो जाने दार्जिलिंग के बारे में

1. दार्जिलिंग में विश्व प्रसिद्ध ट्वाय ट्रेन की सैर बेहद रोमांचकारी है। टेढ़े-मेढ़े रास्तों से गुजरती ट्रेन आपको हर पल यादगार अनुभव देगी। न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक 78 किलोमीटर लंबे ट्वाय ट्रेन के ट्रैक पर कुल 13 स्टेशन हैं। यह पूरा ट्रैक समुद्र तल से 7546 फीट ऊंचाई पर स्थित है।

2. यहां की दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है। 1999 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। ट्वाय ट्रेन की खूबसूरती बतासिया लूप के पास देखते ही बनती है। 360 डिग्री पर घूमती ट्रेन को देखना आंखों को बेहद भाता है।

3. दार्जिलिंग आने पर आप टाइगर हिल जाए बिना नहीं रह सकते। यहां की खूबसूरती देखनी है तो आपको तड़के 3 बजे जागना होगा। यहां से सूर्योदय देखना अद्भुत है। सुबह 4 से शाम 6 बजे तक आप यहां जा सकते हैं। 11 किलोमीटर दूर इस जगह सबसे ज्यादा रोमांच है ट्रैकिंग करने में। आप भी यहां जाएं तो ट्रैकिंग का लुत्फ जरूर उठाएं।

4. अगर आप ट्रेन से पूरे दार्जिलिंग को नहीं घूमना चाहते हैं तो आप दार्जिलिंग स्टेशन से घूम मठ तक जा सकते हैं। आसपास के प्राकृतिक नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। बेहतर होगा कि यह यात्रा आप या तो सुबह या फिर शाम को करें। दिन में अधिकतर भीड़ ही रहती है।

5. यहां की चाय के तो आप भी दीवाने होंगे। आपकी पसंदीदा चाय की पत्ती कैसे बनती है, यह कहां उगती है, कैसे इसकी खेती होती है, ये सब आप यहां देख सकते हैं। दार्जिलिंग की चाय दुनिया की सबसे महंगी और खुशबूदार चाय मानी जाती है।

इस इलाके में ऐसे तकरीबन 86 बागान हैं, जहां की पत्तियां आपको हर रोज सुबह तरोताजा करती है।

6. यहां बेहतरीन किस्म की चाय का तो निर्यात कर दिया जाता है। अच्छी किस्म की चाय पत्ती खरीदने के लिए आपको 500 से 2000 रुपए तक चुकाने पड़ सकते हैं। चाय के लिए आप नाथमुलाज माल जा सकते हैं।

7. टाइगर हिल के पास ही है कभी विश्व की सबसे ऊंची चोटी मानी जाने वाली कंचनजंघा चोटी। बाद में यह तमगा एवरेस्ट को मिल गया, जिसकी ऊंचाई 8850 मीटर (29035 फीट) है। मौसम साफ रहने पर टाइगर हिल से ही कंचनजंघा और एवरेस्ट का दीदार हो सकता है।

दोनों चोटियों की ऊंचाई में महज 827 फीट का अंतर है। कंचनजंघा इतनी रूमानी जगह है कि इसे सबसे रोमांटिक माउंटेन भी कहते हैं।

8. दार्जिलिंग से 5 किलोमीटर दूर बतासिया लूप से कंचनजंघा पर्वतमाला का वृहद रूप देखा जा सकता है। देश की आजादी में अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों की याद में यहां एक स्मारक भी बनाया गया है, जो सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

यहां की मार्केट से आप पर्स, बैग और अन्य सजावटी सामान खरीद सकते हैं।

9. भारत के 7 शांति स्तूपों में से एक दार्जिलिंग में है। जापानी मंदिर यानी पीस पैगोडा। इस बौद्ध मंदिर का निर्माण 1972 ई. में शुरू हुआ था। यह मंदिर 1 नवम्बर 1992 को आम लोगों के लिए खोला गया।

10. भूटिया ‍बस्टी मठ दार्जिलिंग का सबसे पुराना मठ है। ऑब्जेरबेटरी हिल पर 1765 ई. में लामा दोरजे रिंगजे ने इसे बनवाया था। यह मठ तिब्बतियन-नेपाली शैली में बना हुआ है। इस मठ में प्राचीन बौद्ध सामग्री रखी हुई हैं।

यहां तक आएं तो मखाला मंदिर भी जरूर जाएं। इसका ध्यान रखें कि यहां केवल मठ के बाहर फोटोग्राफी की अनुमति है।

11. अंग्रेजों को यह जगह यहां के खास मौसम के चलते बेहद प्रिय थी। इसीलिए गर्मियों में वे अक्सर यहां का रुख करते थे। इस दौरान उन्होंने यहां कई ऐसे निर्माण किए जो आज विश्व की धरोहरों में शामिल हैं।

यहां कब्रिस्तांन, पुरानी स्कूली इमारतों से लेकर चर्च तक देखे जा सकते हैं। पुराने के साथ-साथ नई इमारतें भी बेहद आकर्षक बनाई गई हैं।

12. यहां आप जैविक उद्यान भी जा सकते हैं। आप यहां साइबेरियन बाघ और तिब्‍‍बतियन भेड़िया को भी देख सकते हैं। इस उद्यान के पास ही नेचुरल हिस्ट्रीत म्यूाजियम है। 1903 में बने इस म्यूजियम में विलुप्त प्राय जीव जंतुओं को संरक्षित अवस्था में रखा गया है।

ध्यान रहे कि यह सुबह 10 से शाम 4: 30 बजे तक ही खुला रहता है। बृहस्पपतिवार को यह बंद रहता है।

13. दार्जिलिंग में कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। 2012 में आई रणबीर कपूर की फिल्म ‘बर्फी’ और 2004 में शाहरुख खान की ‘मैं हूं ना’ की शूटिंग भी यहां हो चुकी है।

14. बीते कुछ दिनों में यहां अव्यवस्थित शहरीकरण और काफी संख्या में सैलानियों के आगमन के कारण पर्यावरण बिगड़ा है। हालांकि यह समस्या अब वैश्विक हो चुकी है। दार्जिलिंग शहर 3149 वर्ग किलोमीटर में क्षेत्र में फैला हुआ है। ट्राएंगल शेप लिए इस शहर का उत्तरी हिस्सा नेपाल और सिक्किम से सटा हुआ है।

15. बागदोगरा (सिलीगुड़ी) यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा (90 किलोमीटर दूर) है। दिल्ली, कलकत्ता से यहां के लिए रोजाना उड़ानें हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन जलपाईगुड़ी है। दिल्ली़ से गुवाहाटी राजधानी एक्सप्रेस यहां तक आती है।

यहां रुकने के लिए आपको वाजिब दामों में बजट होटल भी मिल जाएंगे। यह शहर सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग आप कार से 2 घण्टे में पहुंच सकते हैं।

16. दोस्तों के लिए यहां की कोई यादगार तोहफा ले जाना चाहते हैं तो तिब्ब्तियन रिफ्यूजी कैंप जरूर जाएं। इस कैंप में कई तिब्बती शरणार्थी रहते हैं।

यही लोग कारपेट, ऊनी कपड़े, लकड़ी की कलाकृतियां, धातु के बने खिलौने आदि बेचते हैं। यहां आप इन सामानों को बनाने की पूरी प्रक्रिया भी देख सकते हैं, जो अपने आप में अनोखी है।

Tag : darjeeling, Kanchenjungha, Khabar Travel, Tea Garden, Tiger Hill, Toy train, unesco, west bengal, world heritage site

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