Coronavirus: वो चार महानायक, जिनके प्रयासों की दुनिया कर रही है तारीफ

दुनिया के लिए कोरोना खौफ का नाम बन गया है। इन दिनों दुनिया के 160 से ज्यादा देश कोरोना के जानलेवा विषाणु के खौफ के जाए में जी रहे हैं। किसी को कुछ नहीं पता की कब चुपके से ये खौफनाक वायरस किसके शरीर में पहुंच जाए। दुनिया ताकतवर देश भी इसके सामने खुद को पंगू महसूस कर रहा है।

आलम ये है कि दुनियाभर के 160 से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। इस वायरस की चपेट में आने से अबतक 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी है, जबकि ढ़ाई लाख से ज्यादा लोग इस कोरोना के विषाणु से संक्रमित है। वहीं एक आंकड़े के मुताबिक अबतक 90,000 से ज्यादा लोगों स्वस्थ्य हो चुके हैं यानी कोरोना के विषाणु को मात दे चुके हैं।

कोरना वायरस के खतरे की गंभीरत को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन से महामारी घोषित किया है। कोरोना के कहर को रोकने के लिए दुनियाभर के तमाम देश एक साथ खड़े दिख रहे हैं। इसके खिलाफ जहां लोगों को जागरूक किया जा रहा है वहीं दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक इस जानलेवा कोरोना को मात देने के लिए दिनरात 24 घंटे रिसर्च करने में जुटे हैं। ता फैलाने वाले चार लोगों में एक अब दुनिया में नहीं हैं। इनके प्रयासों से कोरोनावायरस से लड़ने में मदद मिली है। दुनिया इनकी सराहना कर रही है।

डॉ. ली वेंगलियांग (Dr. Li Wenliang )
कोरोना वायरस को लेकर जारी कोहराम के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना को खत्म करने के मिशन में जुटे हैं। इन्हीं में से एक हैं चीन के डॉक्टर डॉ. ली वेंगलियांग। हालांकि 34 साल के डॉक्टर ली अब हमारे बीच नहीं हैं। चीन के वुहान में अंजान जानलेवा वायरस से लोगों को महफूज रखने के लिए इन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि अगर चीन ने डॉ ली वेंगलियांग की बात मान लिया होता तो शायद आज कोरोना का विषाणु इतना नहीं फैला होता। डॉ ली वेंगलियांग ने ही सबसे पहले चीन को बताया था कि वुहान में एक घातक नया वायरस जन्म ले चुका है और तेजी से फैल रहा है। लेकिन चीन ने वक्त रहते दुनिया को इस जानलेवा वायरस के बारे में नहीं बताया और इसपर पर्दा डालता रहा है।

इतना ही नहीं चीनी प्रशासन ने झूठी अफवाह फैलाना का आरोप लगाकर चुप करा दिया। चीनी प्रशासन के सामने डॉ ली वेंगलियांग चुप तो हो गए लेकिन वो इस जानलेवा वायरस के पीड़ितों का इलाज करते रहे और खुद इस वायरस की चपटे में आ गए। बाद में इनकी भी मौत हो गई।

डॉ. जहांग जियांग (Dr. Zhang Xiang)
रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट की निदेशक डॉ. जहांग जियांग ने दिसंबर को चौथे हफ्ते में चार लोगों में अज्ञात वायरस के कुछ लक्षण देखे। चारों मरीजों में एक जैसा लक्षण था। उन्हें उन मरीजो को निमोनिया और फेफड़ों में एक जैसा संक्रमण दिख रहा है। उन्हें यह अजीब सा लगा।

उन्होंने तत्काल इस पर रिसर्च शुरू कर दिया और तुरंत हॉस्पिटल के दूसरे डिपार्टमेंट को भी बताया कि यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है बल्कि इसके लक्षण कुछ असामान्य और हटकर हैं। दरअसल डॉ. जहांग जियांगवह सार्स वायरस से निपटने वाली टीम का हिस्सा रह चुके थे, लिहाजा कोरोना से निपटने के मुहिम में उन्हें उस समय एक्सपीरियंस काम आया।

डॉ. चेन वुई (Dr. Chen Vui)
54 साल की डॉ. चेन वुई चीन के द इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइंजीनियरिंग, अकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेस में साइंटिस्ट के पद पर तैनात है। डॉ. चेन वुई चीन के नामी सैन्य जैव-युद्ध विशेषज्ञ भी हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक डॉ. चेन वुई और उनकी टीम ने कोरोनावायरस से लड़ने का वैक्सीन विकसित कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक चीनी सरकार ने उन्हें इस वैक्सीन की क्लीनिकल ट्रायल की भी अनुमति भी दे दी है। अगर यह ट्रायल सफल रहा तो यह कोरोनावायरस के खिलाफ दुनिया का पहला टीका होगा। गौरतलब है कि चेन वुई की टीम ने सार्स से लड़ने के लिए 2003 में स्प्रे बनाया था।

डॉ. नील फर्गुसन (Dr. Neil Ferguson)
52 साल के डॉ. नील फर्गुसन इंपीरियर कॉलेज लंदन के सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजिकल एनालिसिस एंड मॉडलिंग ऑफ इंफेक्सियस डिजीज के निदेशक के पद पर तैनात हैं। नील फर्गुसन ने कोरोनावायरस पर रिसर्च लिखा और उन्होंने इस वायरस के खिलाफ ब्रिटेन की सरकार को आगाह किया।

नील फर्गुसन के रिसर्च पेपर के आधार पर ब्रिटिश सरकार ने जानलेवा कोरोना वायरस के विषाणु लड़ने की नई रणनीति बनाई और उसी का असर है कि ब्रिटेन में कोरोना को लेकर हालात अबतक काबू में हैं।

हालांकि डॉ. नील फर्गुसन खुद कोरोना के शिकार हो गए। नील ने 16 मार्च को ट्विटर पर लिखा कि उन्हें खांसी और बुखार है। उन्हें कुछ-कुछ कोविड जैसे लक्षण दिख रहे थे। इसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है।