ये दुर्लभ पौधा खोल सकता हैं बंद किस्‍मत के दरवाजे, अगर घर और ऑफिस में इस तरह लगाये तो .. जानिए सही तरीका

हरयाली हम सब की आंखों को सुकून देती है, लेकिन आसपास जगह की कमी को देखते हुए हम घर में हरियाली को नहीं ला सकते हैं लेकिन वास्तु के अनुसार अगर घर में बोनसाई पौधों को लगाया जाए तो न केवल घर में हरियाली बिखरेगी बल्कि सुख-समृद्धि और धन-धान्यो में भी बढोतरी होगी। खास बात यह है कि इन पौधों की ऊंचाई और फैलाव बहुत कम होता है, परंतु इनमें फल और पुष्प आदि सामान्य पौधों के समान ही प्राप्त किये जा सकते हैं।

वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार अगर आवासीय भवन और कार्यालयों में बोनसाई पौधे लगाए जा रहे हों तो इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उन्हें पर्याप्त खाद और सूरज की धूप मिलती रहे। क्योंकि इन पौधों के लिए विशेष देखरेख की आवश्यकता होती है। बोनसाई पौधों की समुचित वृद्धि के लिए इनमें सड़ने वाली रेशेदार वनस्पति, गिरे हुए कोमल पत्ते, नीम की खली, गोबर से बनी खाद का प्रयोग ही करना चाहिए। कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खाद के प्रयोग से बचना चाहिए। सही देखरेख के साथ उचित दिशा में लगाए गए बोनसाई पौधे भवन में सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और वास्तु दोषों का निवारण भी करते हैं।

कुछ पौधे होते हैं शुभ और कुछ देते हैं अशुभ प्रभाव – वास्तु नियमों के अनुसार घर एवं कार्यालयों में आम, संतरे, सेब, अंगूर, अनार, केसर, नीम, मौलश्री, चंदन, जयंती, गुड़हल, अशोक, नीम, चंपा, तुलसी, बेल, गुलाब, चमेली आदि के बोनसाई पौधे लगाए जा सकते हैं। जबकि भवन और उसके आस-पास कांटेयुक्त पेड़-पौधे, बेर, दूध निकलने वाले पौधे, कैथल, बरगद, पीपल, बांस, कैक्टस, ढाक आदि लगाना अशुभ फलदायी होता है। इस तरह के बोनसाई पौधे न सिर्फ नकारात्मक ऊर्जा देते हैं बल्कि कई तरह की समस्याओं जैसे अर्थाभाव, घरेलू विवाद, रोग आदि का कारण भी बनते हैं।

पौधों को रखने के लिए जरूरी है सही दिशा का चयन – वास्तु नियमों के अनुसार अगर घर या कार्यालय में उचित दिशा का ध्यान रखते हुए बोनसाई पौधे लगाए जाएं तो इनका शुभ प्रभाव देखने को मिलता है। पूर्व दिशा में तुलसी, पश्चिम में शाक-सब्ज़ी, उत्तर में हरी कोमल दूब या घास और दक्षिण में बड़े पत्तों वाले पौधे जैसे मनी प्लांट लगाने चाहिए। इसी प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में हरी दूब घास, दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में जलीय छायादार पौधे, दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) में भारी तने या पत्ते वाले पौधे तथा उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) में वायु को शुद्ध करने वाले पौधे लगाना शुभ एवं श्रेष्ठ रहता है।