भगवान शिव के बारे में जानिए ये रोचक तथ्य, जो आप शायद नहीं जानते होंगे

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शिव एक संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है, कल्याणकारी ,यजुर्वेद में शिव को शांतिदाता बताया गया है। ‘शि’ का अर्थ है, पापों का नाश करने वाला, जबकि ‘व’ का अर्थ देने वाला यानी दाता। भोलेनाथ की महिमा को कौन नही जानता , उनके ही आशीर्वाद स्वरुप दुनिया के कार्य सम्भव हो पा रहे है ऐसे शिव शम्भू की महिमा का कुछ अंश जो की आप नही जानते होंगे हम बताने जा रहे है …….

1. शंकर भगवान पर कभी भी केतकी का फुल नही चढ़ाया जाता ,क्योंकि यह ब्रह्मा जी के झूठ का गवाह बना था |

2. भोले बाबा ने तांडव करने के बाद सनकादि के लिए चौदह बार डमरू बजाया था. जिससे माहेश्वर सूत्र यानि संस्कृत व्याकरण का आधार प्रकट हुआ था.

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3. किसी भी देवी-देवता की टूटी हुई मूर्ति की पूजा नही होती. लेकिन शिवलिंग चाहे कितना भी टूट जाए फिर भी पूजा जाता है.

5. शंकर भगवान की एक बहन भी थी अमावरी. जिसे माता पार्वती की जिद्द पर खुद महादेव ने अपनी माया से बनाया था.

6. भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है. इसलिए कहते है, तीसरी आँख बंद ही रहे प्रभु की.

7. भरतनाट्यम करते वक्त भगवान शिव की जो मूर्ति रखी जाती है ,उसे नटराज कहते है.

8.भगवान शिव का कोई माता-पिता नही है,उन्हें अनादि माना गया है, मतलब, जो हमेशा से था |जिसके जन्म की कोई तिथि नही.

9.गंगा भगवान शिव के सिर से क्यों बहती है ? देवी गंगा को जब धरती पर उतारने की सोची तो एक समस्या आई कि इनके वेग से तो भारी विनाश हो जाएगा. तब शंकर भगवान को मनाया गया कि पहले गंगा को अपनी ज़टाओं में बाँध लें, फिर अलग-अलग दिशाओं से धीरें-धीरें उन्हें धरती पर उतारें.

10. शंकर भगवान और शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नही चढ़ाया जाता. क्योकिं शिव जी ने शंखचूड़ को अपने त्रिशूल से भस्म कर दिया था. आपको बता दें, शंखचूड़ की हड्डियों से ही शंख बना था.

11. भगवान शिव के गले में जो सांप लिपटा रहता है उसका नाम है वासुकि. यह शेषनाग के बाद नागों का दूसरा राजा था. भगवान शिव ने खुश होकर इसे गले में डालने का वरदान दिया था.

12. चंद्रमा को भगवान शिव की जटाओं में रहने का वरदान मिला हुआ है|

13.आप मृत्यंजय मन्त्र का निरंतर और पूर्ण मन से जाप कर अकालम्रत्यु पर विजय प्राप्त कर सकते है |

14. जिस बाघ की खाल को भगवान शिव पहनते है उस बाघ को उन्होनें खुद अपने हाथों से मारा था|

15. नंदी, जो शंकर भगवान का वाहन और उसके सभी गणों में सबसे ऊपर भी है,वह असल में शिलाद ऋषि को वरदान में प्राप्त पुत्र था, जो बाद में कठोर तप के कारण नंदी बना था|

16. शिवलिंग पर बेलपत्र तो लगभग सभी चढ़ाते है, लेकिन इसके लिए भी एक ख़ास सावधानी बरतनी पड़ती है कि बिना जल के बेलपत्र नही चढ़ाया जा सकता|

17. शंकर भगवान ने जब समुद्र मंथन से निकले हलाहल को पी लिया था वही से प्रभु का नाम नीलकंठ भी हो गया |

18. भगवान शिव और माता पार्वती का 1 ही पुत्र था, जिसका नाम था कार्तिकेय, गणेश भगवान तो मां पार्वती ने अपने उबटन (शरीर पर लगे लेप) से बनाए थे|

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