एक ऐसा समुदाय जो खतरनाक तरीके से ऊंचे पहाड़ों पर लटकते हुए छतों से इकठ्ठा करते है शहद (हनी)

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मध्य नेपाल में रहने वाला गुरुंग समुदाय बेहद ही खतरनाक तरीके से हिमालय कि ऊँची – ऊँची पहाड़ियों कि चट्टानों से लटकते हुए मधुमक्खी के छत्तों (Bee Hives) से शहद (Honey) इकठ्ठा करता है।



ये छत्तें Apis Laboriosa मधुमक्खी के होते है जो कि विशव कि सबसे बड़ी मधुमक्खी है जिसकी लम्बाई 3 c.m. तक हो सकती है। ये मधुमक्खी हिमालय कि ऊँची – ऊँची पहाड़ियों कि चट्टानों पर अपने छत्तें बनाती है।


गुरुंग समुदाय साल में दो बार इन छत्तों से शहद इकठ्ठा करता है। इसके लिए वह मात्र रस्सी कि हाथ से बनी हुई एक सीढ़ी, बांस कि एक टोकरी और दो लकड़ी कि बड़ी – बड़ी छड़े, जिन्हे कि टैंगो कहते है, काम में लेते है।

 

शहद इकठ्ठा करने का काम तीन दिन तक चलता है और काम शुरू करने से पहले, पहाड़ों के देवता को खुश करने के लिए उनकी पूजा कि जाती है।

मधुमक्खियों को छत्तों से दूर करने के लिए नीचे धुंआ किया जाता है। समुदाय का एक सदस्य रस्सी कि सीढ़ी पर चढ़कर छत्तों तक पहुचता है। ऊपर पहुचकर वो बांस कि बड़ी सी छड़ी कि सहायता से छत्तों को तोड़कर बांस कि टोकरी में इकठ्ठा करता है। फिर सवधानी पूर्वक इन छतों को नीचे लाया जाता है।
गुरुंग समुदाय पिछले 400 सालों से इसी तरीके से यह काम करता आ रहा है।

इन छत्तों से प्राप्त शहद में औषधिय गुण बहुत अधिक है क्योंकि यह हिमालय के उन इलाकों में बनते है जहाँ औषधिय पौधों कि भरमार है। इसलिए इस शहद कि फार्मा इंडस्ट्री में बड़ी मांग है खासकर चाइना में।


ट्रेवल फोटोग्राफर Andrew Newey ने वहाँ पर कुछ समय बिताया और गुरुंग समुदाय कि इस कला कि कुछ तस्वीरें उतारी जिससे कि यह प्राचीन और खरनाक कला दुनिया के सामने आई। यहाँ प्रस्तुत सारी तस्वीरे Andrew Newey के द्वारा ली गयी है।