गैजेट के अत्यधिक उपयोग का बच्चों पर बुरा प्रभाव

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आज कल कई बच्चों में आधुनिक गैजेटों से चिपके रहने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। उनके माता-पिता उन्हें बार-बार बाहर जाकर खेलने के लिए उत्साहित करते हैं, लेकिन उन पर जरा भी असर नहीं पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक प्रौद्योगिकी वाले गैजेटों के अतिशय उपयोग से अभिभावकों और बच्चों के बीच तनावपूर्ण संबंध, सामाजिक जान-पहचान की कमी और साधारण कार्यो में अकुशलता जैसे परिणाम सामने आते हैं। नेशनल इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष जे. रवि कुमार ने कहा कि यह सिर्फ किसी बच्चे की नहीं पूरे समाज के लिए एक चिंता का विषय है। रवि कुमार के अनुसार, “इंटरनेट, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन इनके अतिशय उपयोग से होने वाला दुष्प्रभाव पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।”उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी यह समझने की जरूरत है कि उन्हें कितना समय इन गैजेटों के साथ बिताना चाहिए। उन्होंने कहा, “बच्चे वही करना चाहते हैं, जो उनके माता-पिता करते हैं। इसलिए जब वे देखते हैं कि उनके माता-पिता घंटों लैपटॉप पर बिताते हैं, तो उनके बच्चे भी वैसा ही करना चाहते हैं।” इसी तरह के एक बच्चे के माता-पिता ने कहा, “हमें अपने उपयोग पर ध्यान देने की जरूरत है।”

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, बेंगलुरु में क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि छोटे बच्चे जहां वीडियो गेम और गेमिंग एप्स पर अधिक ध्यान देते हैं, वहीं किशोरों का मन सोशल नेटवर्किं ग और इंटरनेट में अधिक रमता जा रहा है। शर्मा ने कहा कि संस्थान के सर्विस फॉर हेल्दी यूज ऑफ टेक्नालॉजी (एसएचयूटी) क्लिनिक को हर सप्ताह देश के दूसरे राज्यों से तीन-चार मेल मिलते हैं। ये मेल किशोरों के माता-पिता के होते हैं, जो संस्थान की सेवाओं और उससे मिलने वाली मदद के बारे में जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “ये माता पिता 14-19 वर्ष उम्र वर्ग के ऐसे किशोरों के होते हैं, जो विडियो गेमिंग, मोबाइल टेक्टिंग, सोशल नेटवर्किं ग साइट तथा पोर्नोग्राफी की लत से प्रभावित होते हैं।” बच्चों का स्कूलों में प्रदर्शन तथा आचरण बिगड़ने के बाद माता-पिता परामर्श लेने के लिए आगे आते हैं। पढ़ें: 2 जीबी रैम वाले बेस्‍ट एंड्रायड स्‍मार्टफोन शर्मा ने कहा कि आज के युग में बच्चों को पूरी तरह से गैजेटों का उपयोग करने से रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बिना आज पूरी शिक्षा हासिल नहीं की जा सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के सेंटर फॉर एजुकेशनल टेक्न ोलॉजी के सहायक प्रोफेसर बानी भट्टाचार्य ने आईएएनएस से कहा, “अभिभावकों का ध्यान मुख्यत: शैक्षिक प्रदर्शन और परीक्षा में मिले अंक पर रहता है। विडियोगेम के फायदे भी हैं, लेकिन स्कूलों के शैक्षिक पाठ्यक्रमों में उन्हें जगह नहीं दी गई है।”

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