क्या आप जानते हो की आसमान से रोकेट गुज़रने के बाद जो सफ़ेद लकीर दिखती है, असल में वो क्या होती है?

हमारे बचपन की वो यादे जो आज भी अकेले में भी हम सब को हँसने पर मजबूर कर देती हे , वो भी क्या दिन थे जब हवाई जहाज़ को नीचे से हाथ हिलाकर बाय – बाय करना और उसे तब तक टक – टकी नजरों से देखना की वह आँखों के सामने से गायब नहीं हो जाता , रॉकेट के गुज़रने के बाद वो आसमान में  बनी सफ़ेद लकीर को देख कर चेहरे पर बड़ी मासूमियत के साथ दिमाग में यही सवाल आता था की आखिर ये हे क्या ? कोई उसे रॉकेट का धुआं कहता था , तो कोई बादलों का धुआं कहता था. हो सकता हे बचपन के उन सवालों के जवाब आप को आज तक नहीं मिले हो . तो आइये आज हम कुछ ऐसे हि सवालों के जवाब लेकर आये हे जिन्हें आप को जानना चाइये ….

रॉकेट के गुज़रने के बाद वो आसमान की बनी सफ़ेद लकीर को Contrails कहते हैं , ये बादल हि होते हे पर आम बादलो से थोड़े अलग होते हे और ये काफी ऊंचाई पर ही बनते हैं. इस तरह के बादल लगभग जमीन से 8 किलोमीटर ऊपर और – 40 डिग्री सेल्सियस में इस तरह के बादल बनते हैं. इस तरह के बादलो के बनने के पीछे का कारण रॉकेट के एग्जॉस्ट से एरोसोल ( Aerosols​) हैं और जब पानी की भाप इन ” एरोसोल” से साथ जम जाती है, तो Contrails ( कॉन्ट्रॉल्स ) बनते हैं.

हवाई जहाज़ और रोकेट के एग्जॉस्ट से भाप और कई ठोस पदार्थ निकलते हैं. इससे कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलती है. इसके अलावा इसमें से सल्फ़ेट और मीथेन जैसे हाइड्रोकार्बन भी निकलते हैं. इनमे से कुछ Contrails बनाने में सहायक होते हैं तो , बाकी सिर्फ़ प्रदूषण को बढाने में मदद करते हे.

सबसे पहले कब देखे गए थे ?

Source- Network54

Contrails( कॉन्ट्रॉल्स ) सबसे पहले 1920 में देखे गए थे उस समय दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था . कॉन्ट्रॉल्स दूर से दिखाई देते हे . इस Contrail की वजह से लड़ाकू विमान के पायलट को कुछ दिखाई नहीं देता था और उसी वजह से वे पकड़े जाते थे, और कई बार ऐसी खबरें भी सुनने में आई थीं कि कॉन्ट्रॉल्स के कारण कई विमान आपस में टकरा गए थे

साधारणत Contrails (कॉन्ट्रॉल्स ) तीन तरह के होते हैं

1. Short Lived Contrails

ये कॉन्ट्रॉल्स कुछ ही समय में गायब हो जाते हैं, जैसे ही विमान या रोकेट जाता है ये भी लुप्त हो जाते हैं.

2. Persistent Contrails (Non-spreading)

ये कॉन्ट्रॉल्स लम्बी लाइन के रूप में होती हे, जो आसमान में विमान जाने के बाद भी दिखती हैं. इस तरह के कॉन्ट्रॉल्स बनने का कारण हवा में नमी होती है.

3. Persistent Spreading Contrails

Source- Chemtrailsplanet

ये कॉन्ट्रॉल्स हवा में फ़ैलने लगती है और ज़्यादा जगह घेरती है. ये भी नमी के कारण आसमान में लम्बे समय तक दिखती है.

कभी – कभी Contrails (कॉन्ट्रॉल्स ) तेज़ हवा की वजह से अपनी जगह से इधर – उधर खिसक भी सकती हे , यह आवश्यक नहीं है कि वो वहीं दिखे जहां से जहाज़ गुज़रा था.

Source- NASA

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