अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

व्यापारी शहजादे से यही वार्ता कर रहा था कि एक दासी ने आ कर गानेवालियों से कहा कि गाना-बजाना शुरू करो। उन लोगों ने तुरंत अपने-अपने साजों को बजाना शुरू कर दिया और गानेवालियाँ गाने लगीं। शहजादा उस स्वर्गोपम संगीत को सुन कर मुग्ध- सा रह गया। इतने में दासियों ने शमसुन्निहार के आने की घोषणा की। शहजादा भी सँभल कर बैठ गया। सब से पहले वही विशेष और मुख्य दासी आई जिसने दस मजदूरिनों से उठवा कर बड़ी चौकी शहजारे के बैठने की जगह के पास रखवाई। फिर कई हब्शिन बाँदियाँ हथियार ले कर उस चौकी के पीछे पंक्तिबद्ध हो कर खड़ी हो गईं। बीस गायिकाएँ और वाद्यकर्मियाँ सामने खड़ी हो गईं जहाँ से वह आनेवाली थीं।

कुछ ही देर में मंद-मंद हंसगति से चलती हुई शमसुन्निहार उन्हीं प्रतीक्षारत सेविकाओं के मध्य अपनी चौकी की ओर आने लगी। उसकी दासियाँ भी सुंदर थीं किंतु उसके रूप की छटा सब से निराली थी। वह सिर से पाँव तक रत्नजटित आभूषणों से लदी थी और दो दासियों के कंधों पर हाथ रखे हुए धीरे-धीरे चल रही थी। वह आ कर अत्यंत शालीनतापूर्वक अपने आसन पर विराजमान हुई। बैठने के बाद उसने संकेत से उसका अभिवादन किया। फिर शमसुन्निहार ने गाने-बजानेवाली सेविकाओं को आज्ञा दी कि अपनी कला का प्रदर्शन करें। हब्शिनों ने गानेवालियों की चौकियाँ उस जगह के समीप लगा दीं जहाँ व्यापारी और शहजादे की चौकी बिछी थी। वे गानेवालियाँ व्यवस्थापूर्वक अपनी चौकियों पर बैठ गईं।

शमसुन्निहार ने एक गानेवाली से कहा कि कोई श्रृंगारिक राग गाओ। उसने अत्यंत मृदु स्वर में एक तड़पता हुआ गीत गाया। यह गीत शहजादे और शमसुन्निहार की दशा को व्यक्त कर रहा था। शहजादा भावातिरेक में बेहाल हो गया। उसने एक वादिका से बाँसुरी ली और बाँसुरी पर तड़पते हुए प्रेम की एक ध्वनि निकाली और बहुत देर तक उसे बजाता रहा। जब उसने बजाना खत्म किया तो शमसुन्निहार ने वही बाँसुरी उससे ली और एक हृदयग्राही ध्वनि निकाली जिसमें शहजादे की बजाई रागिनी से अधिक तड़प थी। शहजादे ने फिर एक वाद्य यंत्र लिया और एक अति मोहक रागिनी उस पर बजानी शुरू की। अब ऐसा वातावरण हो गया कि शहजादा और शमसुन्निहार इतने प्रेम विह्वल हो गए कि उनका संयम जाता रहा। शमसुन्निहार अपनी चौकी से उठ कर बारहदरी के अंदरूनी हिस्से में जाने लगी। शहजादा भी उसके पीछे चल दिया। दो क्षण बाद ही दोनों आलिंगनबद्ध हो गए और सुध-बुध खो कर जमीन पर गिर पड़े।

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