अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

व्यापारी ने समझाना चाहा कि उस सुंदरी के प्रेम में फँसना ठीक नहीं है। उसने कहा, यह खलीफा की सबसे प्यारी सेविका है और वे इसे इतना मानते है कि मुझे कह रखा है कि इसे जिस चीज की जरूरत हो इसे तुरंत दी जाए, यह मेरा निश्चित आदेश है। इस प्रकार व्यापारी ने और भी बातें कहीं कि खलीफा का प्रेम-प्रतिद्वंद्वी बनने में जान का खतरा है। लेकिन अबुल हसन पर उसके समझाने-बुझाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वह शमसुन्निहार के लिए तड़पता रहा।

यह सब चल रहा था कि एक दिन शमसुन्निहार की भेजी हुई विशेष दासी आई। उसने चुपके से व्यापारी से कहा कि स्वामिनी ने आपको और शहजादे को बुलाया है। वे दोनों तुरंत उसके साथ हो लिए। शमसुन्निहार खलीफा के विशाल राजप्रासाद के एक कोने में बने हुए भव्य आवास में रहती थी। दासी दोनों आदमियों को अपनी स्वामिनी के आवास में एक गुप्त द्वार से ले गई। अंदर ले जा कर उसने दोनों को एक स्वच्छ और सुंदर स्थान पर बिठाया। तुरंत ही सुसंस्कृत सेवकों ने सोने की तश्तरियों में भाँति-भाँति के खाद्य पदार्थ ला कर रख दिए। जब वे लोग जी भर खा चुके तो एक दासी उनके लिए सुगंधित मदिरा मूल्यवान प्यालों में लाई। मद्यपान के बाद उनके हाथ धुलवाए गए और भाँति-भाँति के इत्र उनके सामने लाए गए जिन्हें उन्होंने अपने कपड़ों पर मला।

YOU MAY LIKE