अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

व्यापारी समझ गया कि सुंदरी भी शहजादे पर मुग्ध है। उसने शहजादे को लाने का वादा किया। इसके बाद वह अनिंद्य सुंदरी अपने रूप की छटा बिखेरती हुई अपने घर को चल दी। शहजादा बड़ी देर तक टकटकी लगाए उस मार्ग को देखता रहा जहाँ से हो कर वह गई थी। काफी देर इसी तरह बीती तो व्यापारी ने कहा, भाई, यह तुम्हें क्या हो गया है? एक ही जगह पागल की तरह देखे जा रहे हो। लोग तुम्हें इस दशा में देखेंगे तो कितना हँसेंगे। तुम अपने को सँभालो और दूसरी बातों में ध्यान लगाओ।

शहजादे ने कहा, मित्र, यदि तुम मेरे हृदय की दशा जानते तो शायद ऐसा न कहते। जब से मैंने उस मनमोहिनी को देखा है, मैं उसी का हो रहा हूँ। उसका ध्यान बिल्कुल नहीं भुला पा रहा हूँ। भगवान के लिए यह तो बताओ कि उसका नाम क्या है और वह कहाँ रहती है। व्यापारी ने कहा, मेरे प्यारे मित्र, इस सुंदरी का नाम शमसुन्निहार है। यह खलीफा की सबसे चहेती सेविका है। अबुल हसन ने कहा, यह सुंदरी यथा नाम तथा गुण है। शमसुन्निहार का अर्थ है दोपहर का सूर्य। इसका सौंदर्य वास्तव में दोपहर की सूर्य की भाँति प्रखर है जिस पर निगाह नहीं ठहरती। इसीलिए एक बार इसे देखने पर मैं और कुछ देख नही पा रहा हूँ।

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