अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

यह सुन कर जौहरी के होश उड़ गए। उसने फिर शहजादे के मकान की ओर दौड़ लगाई। शहजादे को उसकी बदहवासी को देख कर आश्चर्य हुआ और उसने तुरंत जौहरी से बात करने के लिए एकांत करवाया। जब जौहरी ने उसे पूरा हाल बताया और कहा कि खलीफा ने शमसुन्निहार को गिरफ्तार करवा दिया है तो शहजादे को गश आ गया। कुछ देर में होश आने पर उसने पूछा कि शमसुन्निहार के लिए क्या किया जा सकता है। जौहरी ने कहा कि आप शमसुन्निहार के लिए कुछ नहीं कर सकते, लेकिन यहाँ रहे तो स्वयं भी मरेंगे और मुझे भी मरवा डालेंगे। आप कृपा कर के फौरन उठिए और मेरे साथ इवनाजपुर की ओर प्रस्थान करिए। किसी समय भी खलीफा के सिपाही आ कर हम दोनों को पकड़ सकते हैं और बाद में हम दोनों बड़े निरादरपूर्वक मारे जाएँगे।

शहजादे ने फौरन कुछ तीव्रगामी घोड़ों के लाने का आदेश दिया और कई हजार अशर्फियाँ अपने और जौहरी के पास रखीं और कुछ सेवकों के साथ शहर से निकल पड़े। कई रोज वे उसी तरह रात-दिन चलते रहे। एक दिन दोपहर के समय वे थकान के कारण आराम करने के लिए वृक्षों के नीचे लेटे। इतने में डाकुओं के एक दल ने उन पर आक्रमण कर दिया। शहजादे के नौकरों ने उनका सामना किया किंतु सब मारे गए। डाकुओं ने शहजादे और जौहरी के सारे हथियार, घोड़े और धन ले लिया बल्कि उनके शरीर के कपड़े भी उतार लिए और उन दोनों को वैसा ही असहाय छोड़ कर चले गए।

शहजादे ने कहा, संसार में मुझसे अधिक अभागा कौन होगा कि एक विपत्ति समाप्त नहीं होती कि दूसरी आ पड़ती है। यदि इस्लाम में आत्महत्या को पाप न समझा जाता तो मैं अपनी जान अपने हाथों दे देता। अब मैंने तय किया है कि यहाँ से कहीं नहीं जाऊँगा बल्कि शमसुन्निहार की याद में यहीं जान दे दूँगा। जौहरी ने उसे बहुत समझाया-बुझाया कि इस प्रकार निराश नहीं होना चाहिए और भगवान की इच्छा को स्वीकार करना चाहिए। बहुत समझाने पर शहजादा उठा और दोनों एक पगडंडी पर चलने लगे। कई मील चल कर इन्हें एक मस्जिद मिली। वे दोनों भूखे-प्यासे रात भर वहीं पड़े रहे।

सवेरे एक भला मानस वहाँ नमाज पढ़ने आया। नमाज के बाद उसने दो आदमियों को एक कोने में दुबक कर बैठे देखा। उसने कहा कि तुम लोग परदेसी जान पड़ते हो। जौहरी ने कहा, हमारी दशा आप देख ही रहे हैं। हम लोग बगदाद से आ रहे थे कि रास्ते में डाकुओं ने हमें लूट लिया, कुछ भी हमारे पास न छोड़ा। उस आदमी ने कहा कि आप लोग मेरे घर चलें और आराम करें। जौहरी बोला, कैसे चलें? वे लोग हमारे कपड़े भी ले गए और हम नंगे बैठे हैं। उस आदमी ने बाहर जा कर अपने घर से दो चादरें लीं और मस्जिद में आ कर इन लोगों से चलने को कहा।

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