अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

फिर वह शहजादे के घर उसका हालचाल पूछने को गया। शहजादे के नौकरों ने बताया वे जब से आए हैं आँखें बंद किए अपने बिस्तर पर पड़े हैं। उन्होंने कुछ भी खाया-पिया नहीं है। जौहरी इससे चिंतित हुआ। उसने शहजादे के पास जा कर उसे बड़ा धैर्य दिया। शहजादे ने जौहरी की आवाज सुन कर आँखें खोलीं और उसकी बातें सुनता रहा। फिर उसने जौहरी का हाथ दबा कर कहा कि मित्र, तुमने हमारे लिए बड़ा कष्ट सहा, मैं कैसे तुम्हारा आभार प्रकट करूँ। जौहरी ने कहा, मैं आपका सेवक हूँ, आपके लिए सब कुछ कर सकता हूँ किंतु भगवान के लिए खाना-पीना शुरू कीजिए और अपने स्वास्थ्य को ठीक रखिए।

शहजादे ने जौहरी के कहने से कुछ खाया-पिया। फिर एकांत में उसने शमसुन्निहार का समाचार पूछा। जौहरी ने कहा, वह कुशलपूर्वक हैं और कल ही उसने अपनी दासी को भेजा था कि मुझसे आप की कुशलक्षेम पूछें। जौहरी इसके बाद अपने घर आना चाहता था किंतु शहजादे ने उसे रोक लिया और आधी रात तक जाने न दिया। आधी रात को जौहरी अपने घर गया और दूसरे दिन फिर शहजादे के पास पहुँचा। शहजादे ने चाहा कि जौहरी की क्षतिपूर्ति के निमित्त कुछ धन दे दे किंतु जौहरी ने न लिया और कहा कि मुझे शमसुन्निहार ने काफी धन इस हेतु दे दिया है। दोपहर को जौहरी शहजादे से विदा हो कर अपने घर पहुँचा।

उसे घर पहुँचे बहुत देर न हुई थी कि शमसुन्निहार की वही विश्वस्त दासी रोती-पीटती उसके घर पहुँची। उसने बताया कि अब तुम्हारी और शहजादे की जान खतरे में है। अगर तुम लोगों को अपने प्राण प्यारे हैं तो तुरंत शहर छोड़ कर कहीं को निकल जाओ। जौहरी ने हैरान हो कर कहा, आखिर हुआ क्या है? तू क्यों इतना रो-पीट रही है और क्यों मुझे इतना भय दिखा रही है? साफ-साफ पूरी बात बता। उस दासी ने कहा, जब हम लोग उस मकान से भाग कर अपने आवास पर पहुँचे और बाद में शमसुन्निहार भी घर पहुँची तो उसने मेरे साथ की दो दासियों में से एक को किसी बात पर रुष्ट कर उसे दंड देने की आज्ञा दी। उस पर बहुत मार पड़ी और वह उसी रात को भय और क्रोध के कारण शमसुन्निहार के महल से भाग गई और महल के रक्षकों के प्रधान के पास शरण लेने चली गई।

उस दासी ने रक्षकों के प्रमुख से उस रात का सारा हाल बता दिया। रक्षकों के प्रमुख ने उसे न जाने क्या सलाह दी। फिर वह खलीफा के महल में चली गई और संभवतः उसने खलीफा को भी सारी बातें बता दीं। खलीफा ने बीस सिपाही भेज कर शमसुन्निहार को पकड़वा कर बुलाया। इसके आगे मुझे नहीं मालूम कि उसने उसे मरवा डाला या कुछ और किया। मैं यह देख कर सारा हाल तुमसे कहने आई हूँ।

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