अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

इसके बाद वे डाकू उन तीनों को एक नाव में बिठा कर नदी के पार तक छोड़ गए। किंतु ज्यों ही वे तीनों तट पर उतरे कि गश्त के सिपाही इधर आ निकले। डाकू तो उन्हें देखते ही अपनी नाव तेजी से खेते हुए भाग गए किंतु गश्तवालों ने इन तीनों को पकड़ लिया और पूछा कि तुम लोग इस निर्जन स्थान में क्या कर रहे थे।

जौहरी ने सच्ची बात न बताई बल्कि कहा कि डाकू दल मेरे घर डाका डाल कर मुझे पकड़ ले गए और इन दोनों को भी मेरे यहाँ से पकड़ ले गए। आज न जाने क्या सोच कर उन्होंने हम सभी को नदी पार पहुँचा दिया और लूटा हुआ कुछ माल भी वापस कर दिया। उसने कहा कि वे लोग जो नाव में नदी पार कर रहे हैं डाकू ही हैं। गश्त के मुखिया ने उसकी बात का विश्वास कर लिया। उसे छोड़ कर शहजादे और शमसुन्निहार से पूछने लगे कि तुम लोग कौन हो और इस सुंदरी को उसके घर से कौन लाया है। इस पर शहजादा तो कुछ न बोला किंतु शमसुन्निहार ने गश्ती दल के मुखिया को अलग ले जा कर कुछ कहा। उसने तुरंत घोड़े से उतर कर उसे सलाम किया और आदेश दिया कि दो नावें लाई जाएँ। उसके एक पर शमसुन्निहार को बिठा कर उसके घर पहुँचाने का आदेश दिया। दूसरी पर माल की गठरियों के साथ ही शहजादे और जौहरी को बिठा कर अपने दो सिपाही उनके साथ कर दिए ताकि वे उन्हें सुरक्षापूर्वक उनके घर पहुँचा दें।

किंतु वे सिपाही इन लोगों से खुश नहीं थे। उन्होंने नाव को शहर के घाट पर ले जाने के बजाय कारागार की ओर मोड़ दिया और जौहरी के लाख प्रतिवाद करने पर भी उन्हें कारागार में पहुँचा दिया। कारागार के प्रधान अधिकारी ने इन लोगों से पूछा कि तुम लोग कौन हो और तुम्हें क्यों पकड़ा गया है। जौहरी ने इस अधिकारी को भी पूरी बात बताई और कहा कि गश्ती दल के मुखिया ने हमारी बात का विश्वास कर के हमें हमारे घर पहुँचाने का आदेश दिया था किंतु इन दो सिपाहियों ने हमें बंदीगृह में पहुँचा दिया – शायद यह लोग हमसे कुछ घूस चाहते थे और वह न मिलने पर उन्होंने ऐसा किया। कारागृह के अधिकारी को भी जौहरी की बात का विश्वास हो गया।

उसने गश्त के दोनों सिपाहियों को खूब डाँटा-फटकारा और अपने दो सिपाहियों को आदेश दिया कि दोनों को माल-असबाब के साथ शहजादे के घर पर पहुँचा दिया जाए।

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